भुवनेश्वर , फरवरी 09 -- ओडिशा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने सोमवार को राज्य में धान की खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों को हो रही कठिनाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की और व्यापक शोषण एवं प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी का ध्यान आकर्षित करते हुए, श्री पटनायक ने राज्य सरकार से किसानों की बढ़ती परेशानी को दूर करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में श्री पटनायक ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता और भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा 2024 के चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने में विफल रहने के कारण खरीफ धान की खरीद प्रक्रिया एक गंभीर संघर्ष में परिवर्तित हो गई है। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि करने एवं कटौतियों को पूरी तरह समाप्त करने का वादा किया था।
हालांकि, श्री पटनायक ने आरोप लगाया कि पूरे राज्य की मंडियां उत्पीड़न केंद्र बन गई हैं, जहां किसानों को नमी की मात्रा एवं खराब गुणवत्ता के नाम पर पांच-सात किलोग्राम प्रति क्विंटल तक की मनमानी कटौती का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई जिलों में यह प्रथा संकट का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरी है जो मिल मालिकों एवं स्थानीय अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत से प्रेरित है जिससे किसानों को उनकी कड़ी मेहनत के उचित मूल्य से वंचित होना पड़ रहा है।
सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा कि भाजपा अपने चुनावी वादों को कब पूरा करेगी और अपने घोषणापत्र में किए गए आश्वासनों के अनुसार किसानों को न्याय कब दिलाएगी। श्री पटनायक ने सरकार के उस फैसले की भी आलोचना की जिसमें प्रति किसान 800 रुपये प्रति क्विंटल की इनपुट सब्सिडी के लिए 150 क्विंटल की सीमा निर्धारित की गई है और इसे सभी किसानों से किए गए वादे का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम अधिक उत्पादन करने वाले किसानों को अनुचित रूप से दंडित करता है और भाजपा के अपने संकल्प पत्र के विपरीत है। उन्होंने संपूर्ण उपज पर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की इनपुट सब्सिडी प्रदान करने के अपने वादे से सरकार के पीछे हटने पर भी सवाल खड़ा किया।
परिचालन संबंधी विफलताओं पर प्रकाश डालते हुए श्री पटनायक ने कहा कि धान की खरीद प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है जिससे किसानों को अपनी फसल को ओस एवं चोरी से बचाने के लिए रात भर जागना पड़ रहा है। उन्होंने मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, टोकन प्रणाली की विफलता एवं भुगतान में अनुचित देरी को किसानों को विरोध प्रदर्शन की ओर धकेलने वाला कारण कहा।
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