मुंबई , फरवरी 06 -- डिजिटल बैंकिंग माध्यमों से धोखाधड़ी के शिकार लोगों को बड़ी राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों को 25 हजार रुपये तक वापस करने का प्रस्ताव किया है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में बताया कि इसके लिए जल्द ही केंद्रीय बैंक एक फ्रेमवर्क जारी करेगा। इसमें 50 हजार रुपये या उससे कम की धोखाधड़ी के मामलों को शामिल किया जायेगा।

श्री मल्होत्रा में बाद में संवाददाताओं के सवालों के जवाब देते हुए बताया कि "बिना कोई सवाल पूछे" ग्राहकों को 85 प्रतिशत राशि (अधिकतम 25 हजार रुपये) वापस की जायेगी।

धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठायेगा। शेष 70 प्रतिशत राशि आरबीआई देगा। हालांकि किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा।

आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि ग्राहक इस सुविधा का लाभ अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार उठा सकेंगे। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि ग्राहक एक बार की गलती से सीख लें।" एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने साफ किया कि भले ही ग्राहक ने खुद ही ठगों को ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बताया हो, तब भी वे हर्जाना राशि पाने के हकदार होंगे।

श्री मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी में 50 हजार रुपये तक की राशि वाले मामले 65 प्रतिशत हैं, हालांकि मूल्य के हिसाब से उनका अनुपात काफी कम है।

आरबीआई 70 प्रतिशत नुकसान की भरपाई के लिए अपनी अधिशेष आय का इस्तेमाल करेगा। श्री मल्होत्रा ने कहा कि इसके लिए केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त पैसा है।

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