पटना , अप्रैल 18 -- िहार ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से राज्यभर में विकसित पक्की सड़कों का सुदृढ़ नेटवर्क अब ग्रामीण बिहार में व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव का आधार बन चुका है। जहाँ कभी कच्चे रास्तों, कीचड़ और जलजमाव के कारण आवागमन बाधित रहता था, वहीं आज बारहमासी पक्की सड़कों ने गाँव-गाँव को मुख्यधारा से जोड़कर आवागमन को सरल, सुरक्षित और निर्बाध बना दिया है।
इस परिवर्तन का सबसे सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण महिलाओं के जीवन पर देखने को मिला है। अब वाहन सीधे गाँव के अंतिम छोर तक पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दैनिक जरूरतों के लिए उनका आवागमन सुरक्षित और सुगम हो गया है। पहले जहाँ खराब ग्रामीण सड़कों के कारण गाड़ियां आसानी से नहीं मिलती थीं और महिलाओं को घंटों खड़े रहकर वाहन का इंतजार करना पड़ता था। वहीं अब पक्की ग्रामीण सड़कों के निर्माण से परिवहन सुविधाएं सुलभ हो गई हैं। इससे महिलाओं का सफर न केवल सुरक्षित और बाधारहित हुआ है, बल्कि यातायात के लिए उनका घंटों का थका देने वाला इंतजार भी अब पूरी तरह खत्म हो गया है।
ग्रामीण सड़कों के इस सुदृढ़ जाल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन के नए द्वार भी खोल दिए हैं। बेहतर संपर्कता के कारण उन लोगों को संबल मिला है, जो पहले आजीविका की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को विवश थे। अब परिवहन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने परिवहन साधनों से संबंधित स्वरोजगार अपनाया है, जिससे पलायन में कमी आई है और गाँवों में आय के स्थायी स्रोत सुनिश्चित हुए हैं।
ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा किये गये सड़क संपर्कता के इस विस्तार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित ये सड़कें महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार और समावेशी विकास की सुदृढ़ आधारशिला बन रही हैं।
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