नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने विरासत स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2026-27 की बजट में 15 पुरातत्व स्थलों को जीवंत सांस्कृतिक स्थलों के रूप में विकसित करने की घोषणा की।

वित्तमंत्री ने रविवार को घोषणा की कि लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 'विभिन्न खुदाई वाले स्थलों' को व्यवस्थित पैदल रास्तों के माध्यम से जनता के लिए खोला जाएगा। इन स्थलों पर पर्यटकों को शानदार अनुभव प्रदान करने के लिए तथा गाइडों एवं व्याख्या केंद्रों की सहायता के लिए नये तकनीकों और कहानी सुनाने की तकनीकों को पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि लोथल, धोलावीरा और राखीगढ़ी हडप्पा सभ्यता के तीन प्रमुख पुरातात्विक स्थल हैं। धोलावीरा, गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित है और यह हड़प्पा सभ्यता की इंजीनियरिंग और जल प्रबंधन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। यूनेस्को ने 2021 में धोलावीरा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी थी। लोथल गुजरात के भाल क्षेत्र में स्थित एक अन्य महत्वपूर्ण हडप्पा स्थल है। इसे दुनिया का सबसे पुराने ज्ञात बंदरगाह माना जाता है। यहाँ से मोतियों, रत्नों और गहनों का व्यापार पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका तक किया जाता था। लोथल को विश्व स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में उभारने के उद्देश्य से 2022 में यहां राष्ट्रीय समुद्री विरासत परियोजना की शुरूआत की गयी थी।

राखीगढ़ी भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा हड़प्पाकालीन स्थल (550 हेक्टेयर) है। यह हरियाण के हिसार जिले में घग्गर-हाकरा नदी के किनारे स्थित है। इससे पहले, बजट 2025-26 में राखीगढ़ी को विश्व स्तरीय विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

आदिचनल्लूर लौहयुगीन-महापाषाणिक स्थलों में से एक है, जहाँ मिट्टी के विशाल कलशों में दफ़न मानव अवशेष मिले हैं। यह तमिलनाडु के थूथुकुडी ज़िले में थामिरबरानी नदी के किनारे स्थित है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित