चंडीगढ़ , अप्रैल 10 -- भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि राज्य सरकार 13 अप्रैल को होने वाले विशेष विधानसभा सत्र में राज्य के किसानों के लिए फसल बीमा योजना लागू करने का एलान करे। श्री जाखड़ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को एक पत्र भी लिखा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पूरे देश के लिए फसल बीमा योजना बनाई गई है लेकिन पंजाब सरकार इसे लागू नहीं कर रही है, जो किसानों के साथ सरासर धोखा है।
उन्होंने कहा कि इस समय पंजाब का किसान बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से बड़े स्तर पर फसलों का नुकसान हुआ है। इससे पहले 2023 और 2025 में आई बाढ़ ने भी भारी तबाही मचाई थी और अभी तक भी कई किसानों को मुआवजा नहीं मिला है, क्योंकि पंजाब में कोई फसल बीमा योजना लागू नहीं है।
श्री जाखड़ ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि तीन साल पहले यह घोषणा की गई थी कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जगह पंजाब सरकार अपनी कृषि बीमा योजना लाएगी लेकिन तीन साल बीत जाने के बावजूद और हजारों करोड़ के नुकसान के बाद भी यह योजना अभी तक लागू नहीं हुई है।
भाजपा नेता ने कहा कि अब जब सोमवार को विशेष विधानसभा सत्र बुलाया गया है, तो मुख्यमंत्री को अपने वादे के अनुसार बिना देरी किए इस सत्र के दौरान पंजाब की अपनी फसल बीमा योजना लागू करने का एलान करना चाहिए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों के नुकसान की भरपाई हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो तुरंत केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना लागू की जाए, जो देश के अन्य राज्यों में पहले से लागू है और किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।
श्री जाखड़ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बेहतर होगा कि सरकार विज्ञापनों पर खर्च करने के बजाय कर्ज के बोझ तले दबे किसानों पर कुछ राशि बीमा योजना के प्रीमियम भरने पर खर्च करे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से समाज का हर वर्ग परेशान है-किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा, व्यापारियों और उद्योगपतियों को शांत माहौल नहीं मिल रहा, और खराब कानून-व्यवस्था व नशे की समस्या ने लोगों में डर का माहौल बना दिया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्य 58 प्रतिशत डीए दे रहे हैं, वहीं पंजाब केवल 42 प्रतिशत दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार डीए देने के बजाय उच्चतम न्यायालय में अपील करने जा रही है, जो उसकी कर्मचारी विरोधी नीति को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि सरकार बिना देरी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया डीए जारी करे।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग 2027 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब वे इस जनविरोधी सरकार को सत्ता से बाहर कर सकेंगे।
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