अमृतसर , दिसंबर 29 -- पंजाब राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सोमवार को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) करमजीत सिंह की पुस्तक 'मेडिटेशन टू मार्टिरडम: द लेगेसी ऑफ श्री गुरु तेग बहादुर जी' का औपचारिक रूप से विमोचन किया।
राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह, पंजाब के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति और राज्य के सीमावर्ती जिलों के कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। पुस्तक के विमोचन से पहले, प्रोफेसर (डॉ.) करमजीत सिंह ने प्रकाशन को सहर्ष जारी करने के लिए राज्यपाल को धन्यवाद दिया और इस कृति को प्रकाशित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पंजाब सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रो सिंह ने पुस्तक की पांच प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पुस्तक तीन लिपियों, गुरुमुखी, देवनागरी (हिंदी) और अंग्रेजी अनुवाद में प्रस्तुत की गयी है, जिससे गुरु तेग बहादुर की बानी भाषाई सीमाओं के पार सुलभ हो जाती है। इस पुस्तक को एक अनूठी 'बोलने वाली पुस्तक' के रूप में विकसित किया गया है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 59 शबद और 57 श्लोक श्री गुरु ग्रंथ साहिब में निहित हैं, जो 15 रागों में रचित हैं, जिनमें दुर्लभ और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण जयजवंती राग भी शामिल है। इन सभी शबदों को हजूरी रागी भाई नरिंदर सिंह के मार्गदर्शन में प्रामाणिक रूप से रिकॉर्ड किया गया है, और पाठकों को मधुर स्वर में गुरबानी सुनने में सक्षम बनाने के लिए क्यूआर कोड शामिल किये गये हैं।
इस पुस्तक में सहज से शहीदी तक नामक एक विशिष्ट अध्याय शामिल है, जो आंतरिक समभाव से लेकर सर्वोच्च बलिदान तक की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन करता है। यह कृति श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, बानी और शहादत से 13 व्यावहारिक पाठ निकालती है, जो समकालीन जीवन के लिए प्रासंगिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। पुस्तक इतिहास को समकालीन चेतना से जोड़ती है, श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि साहस, आस्था की स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और नैतिक नेतृत्व के लिए एक जीवंत नैतिक ढांचे के रूप में प्रस्तुत करती है।
प्रो सिंह ने बताया कि पुस्तक को दो भागों में विभाजित किया गया है। पहले भाग में श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, दर्शन और चिरस्थायी विरासत का विस्तृत वर्णन करने वाले पाँच अध्याय हैं, जबकि दूसरा भाग गुरबानी को समर्पित है, जिसमें शब्द और श्लोक लिखित रूप में प्रस्तुत किये गये हैं और क्यूआर कोड-सक्षम ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से भी उपलब्ध कराये गये हैं।
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