चंडीगढ़ , मार्च 21 -- पंजाब की किसान संगठनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के सामने एक बार फिर आवाज उठाई है। किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब के लोगों को नौकरियों में प्राथमिकता के आधार पर अवसर दिए जाएं। इसके साथ ही गन्ने के बकाया भुगतान और भविष्य की फसल योजना से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
नेताओं ने प्रदेश में बढ़ते नशे के प्रभाव पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि नशे के कारण हो रही मौतों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने नशा रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की और अफीम की नियंत्रित खेती पर भी चर्चा की जरूरत बताई।
उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर 2021 को राज्यपाल के निर्देश पर पंजाब सरकार ने जनरल कैटेगरी आयोग बनाने का फैसला किया था, लेकिन यह आयोग प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाया। चेयरपर्सन के इस्तीफे और सदस्यों की निष्क्रियता के चलते आयोग को भंग कर दिया गया। अब किसानों ने इस आयोग को दोबारा गठित करने की मांग की है ताकि जनरल वर्ग के गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके।
बेरोजगारी के मुद्दे को उठाते हुए नेताओं ने कहा कि पंजाब के पढ़े-लिखे युवा बड़ी संख्या में विदेश जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि रोजगार के अवसर बढ़ाकर युवाओं को प्रदेश में ही रोका जाए।
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