चंडीगढ़ , मार्च 19 -- पंजाब में अमृतसर जिले के मजीठा के गांव कोट हिरदे राम के, आम आदमी पार्टी (आप) से संबंधित, सरपंच की गिरफ्तारी ने राज्य में नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। उक्त सरपंच, जो यूथ हलका इंचार्ज, तलबीर गिल के पीए और पार्टी के फाइनेंसर के रूप में भी सक्रिय है, को चार किलोग्राम से अधिक हेरोइन, एक पिस्तौल और कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया गया है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इस मामले को लेकर सत्ताधारी पार्टी पर तीखा हमला बोला है।
यहां गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल के प्रवक्ता और लीगल सेल के प्रमुख अर्शदीप सिंह क्लेर ने कहा कि यह घटना राज्य के लिए 'गंभीर चिंता' का विषय है। उनके साथ रणबीर राणा और जसप्रीत सिंह बराड़ भी मौजूद थे। क्लेर ने आरोप लगाया कि इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं और सरपंच को नशीले पदार्थों की तस्करी करते समय रंगे हाथों पकड़ा गया है, जो एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
अर्शदीप क्लेर ने इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों के हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को इस नेटवर्क की गहराई और इसके संभावित संबंधों का पर्दाफाश करने के लिए विस्तृत जांच करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से कई तीखे सवाल पूछे कि यह नेटवर्क कहाँ तक फैला हुआ है और अब तक कितनी हेरोइन पंजाब में लाई जा चुकी है? इस अवैध व्यापार में और कौन-कौन शामिल है? क्या ड्रग मनी का कोई हिस्सा राजनीतिक नेताओं तक भी पहुंचा है?क्लेर ने तरनतारन की पिछली घटना का भी हवाला दिया, जहां एक केंद्रीय एजेंसी ने 'आप' सरपंच को भारी मात्रा में हेरोइन के साथ पकड़ा था। उन्होंनेआरोप लगाया कि मजीठा का एक एसएचओ सीधे तौर पर गिरफ्तार सरपंच लवप्रीत सिंह को रिपोर्ट करता है। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "आम आदमी पार्टी ने विरोधियों पर नशे और गैंगस्टरों के आरोप लगाकर अपनी राजनीति चमकाई, जबकि आंतरिक रूप से नशे के व्यापार को फलने-फूलने दिया। अरविंद केजरीवाल ने कम समय में नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन आज जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है।" अकाली दल के नेता ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने डीजीपी को फटकार लगायी थी और यहां तककहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार नशे के व्यापार को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के "नशे के विरुद्ध युद्ध" अभियान की विश्वसनीयता तब खत्म हो जाती है जब सत्ताधारी दल के पदाधिकारी ही नशे के साथ पकड़े जाते हैं। शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस गंभीर मामले पर चुप्पी तोड़ने और जवाब देने की मांग की है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित