चंडीगढ़ , दिसंबर 27 -- साल 2025 में पंजाब ने सदी की सबसे भीषण बाढ़ आपदाओं में से एक का सामना किया जिसमें लगभग 51 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 1.84 लाख हेक्टेयर से अधिक की फसलें बर्बाद हो गयी हैं।
राज्य में बाढ़ के कारण 3,87,898 से ज़्यादा लोग सीधे तौर पर विस्थापित हुये हैं और सभी 23 बाढ़ प्रभावित ज़िलों के 2,050 गांवों में 20 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुये हैं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुयी है। यह साल श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस समारोह, किसान आंदोलन और अपराध, आतंकवाद और नशे के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई का वर्ष रहा।
किसानों के लिए यह साल बहुत मुश्किल साबित हुआ, क्योंकि बाढ़ से हुए नुकसान के कारण मौजूदा रबी मौसम में लगभग 1,500 एकड़ ज़मीन पर गेहूं की बुवाई नहीं की जा सकी। सर्दियों की फसल के इस नुकसान ने खाद्य उत्पादन, आय की स्थिरता और पिछले सीज़न के झटके से किसानों के उबरने की क्षमता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। सबसे बड़ा झटका अगस्त में लगा, जब भारी बाढ़ ने सुल्तानपुर लोधी और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर खेतों को डुबो दिया, ठीक उसी समय जब किसान अपनी खड़ी धान की फसल काटने की तैयारी कर रहे थे।
राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना के लगभग 30 हेलीकॉप्टर लगे हुये थे, जबकि बीएसएफ, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने भी जमीनी स्तर पर सहायता की। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सूखा राशन, पीने का पानी, दवाइयां और जरूरी सामान सहित राहत सामग्री 24 घंटे भेजी गयीं। पंजाब सरकार ने सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों से 22,938 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इसके अलावा, 219 राहत शिविर स्थापित किये हैं। इन शिविरों में कुल 5,404 लोगों को ठहराया गया है। राज्य के कई ज़िलों में उफनती नदियों ने हजारों एकड़ जमीन को डुबो दिया, जिससे महीनों की मेहनत और निवेश कुछ ही दिनों में बर्बाद हो गया। कई गांवों में नुकसान इतना ज़्यादा था कि ज़मीन अगले गेहूं की बुवाई के मौसम के लिए भी बेकार हो गयी, जिससे नुकसान और बढ़ गया और आने वाले साल के लिए आय की सुरक्षा खतरे में पड़ गयी। सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रामपुर गौरा गांव था, जहां ब्यास नदी ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया, जिससे रातों-रात उपजाऊ कृषि भूमि बह गयी। खेती योग्य खेतों के पूरे हिस्से गायब हो गये, उनकी जगह रेत की मोटी परतें और बुरी तरह से कटी-फटी मिट्टी रह गयी, जो ज़मीन कभी पीढ़ियों तक परिवारों का पेट पालती थी, वह बंजर हो गयी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नौ सितंबर को बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए गुरदासपुर पहुंचे। रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू राजधानी से इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ पहुंचे हैं। श्री मोदी ने पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने गुरदासपुर के टिब्बडी कैंट में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री ने पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की, जो राज्य को पहले से आवंटित 12,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त है। उन्होंने बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में मारे जाने वालों के निकटतम परिजनों को दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि देने की भी घोषणा की। उन्होंने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और पीएम किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त की अग्रिम रिलीज़ की भी घोषणा की। उसी दिन, पीएम मोदी ने बादल फटने, भारी बारिश और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए हिमाचल प्रदेश का दौरा किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की, साथ ही एसडीआरएफ फंड और पीएम किसान सम्मान निधि की एडवांस रिलीज़ की भी घोषणा की।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पठानकोट के कोलाइन गांव का दौरा किया, जो बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है, और निवासियों को आश्वासन दिया कि श्री मोदी व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
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