चंडीगढ़/ लुधियाना , मई 08 -- पंजाब के वित्त, आबकारी एवं कराधान विभाग ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित फर्जी बिलिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
वित्त, आबकारी एवं कराधान मामलों के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शुक्रवार को बताया कि स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट ( एसआईपीयू ) ने लुधियाना स्थित कंपनी एपीआई प्लास्टिक रिसाइकलर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता परमजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 85.4 करोड़ रूपए के फर्जी लेन-देन के आधार पर 15.56 करोड़ रूपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने का आरोप है।
श्री चीमा ने कहा कि जांच में सामने आया है कि कंपनी कई राज्यों की गैर-मौजूद और फर्जी फर्मों द्वारा जारी नकली बिलों के आधार पर बिना माल प्राप्त किए आईटीसी ले रही थी। कई सप्लायर फर्में पहले ही जीएसटी विभाग द्वारा रद्द, निलंबित या गैर-कार्यशील घोषित की जा चुकी थीं। उन्होंने बताया कि विभाग ने ई-वे बिल और फास्टैग टोल डेटा का विश्लेषण किया, जिससे साबित हुआ कि जिन वाहनों को माल ढुलाई के लिए दिखाया गया, वे घोषित मार्गों से अलग स्थानों पर पाए गए। इससे साफ हो गया कि वास्तविक परिवहन हुआ ही नहीं। जांच में ऐसे 407 संदिग्ध वाहन मूवमेंट सामने आए, जिनसे 2.65 करोड़ से अधिक की फर्जी आईटीसी ली गई।
वित्त मंत्री ने कहा कि जांच में फर्जी डेबिट नोट्स के जरिए करीब 5.79 करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकली आईटीसी लेने का तरीका भी सामने आया। इन दस्तावेजों में कर योग्य राशि और टैक्स राशि समान दिखाई गई थी, जो जीएसटी कानून के तहत असंभव है। तलाशी के दौरान विभिन्न ट्रांसपोर्टरों की खाली गुड्स रिसीट बुक्स भी बरामद हुईं, जिससे फर्जी परिवहन दस्तावेज तैयार करने का खुलासा हुआ।
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