पटना , अप्रैल 25 -- ल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग ने बिहार न्यूरोसर्जरी सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ ईस्टर्न न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ इंडिया के सहयोग से, शनिवारको "न्यूरोवैस्कुलर अपडेट पटना 2026" नाम से एक उच्च-स्तरीय ट्रेनिंग वर्कशॉप सफलतापूर्वक आयोजित की।

इस वर्कशॉप का मुख्य फोकस ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के इलाज के लिए एडवांस्ड एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाओं और सेरेब्रल बाईपास सर्जरी पर था। पूरे देश से 105 न्यूरोसर्जनों ने अत्याधुनिक न्यूरोवैस्कुलर तकनीकों में हैंड्स-ऑन (प्रैक्टिकल) ट्रेनिंग प्राप्त की।इस पहल से बिहार में न्यूरोवैस्कुलर बीमारियों के इलाज के क्षेत्र में काफी सुधार होने की उम्मीद है। पारंपरिक न्यूरोसर्जिकल तरीकों की तुलना में मृत्यु दर और बीमारी की गंभीरता को कम करके, इससे सालाना एक लाख से अधिक मरीजों को संभावित रूप से लाभ मिल सकता है।

वर्कशॉप के दौरान, जाने-माने विशेषज्ञों ने ब्रेन एन्यूरिज्म, आर्टेरियोवेनस मालफॉर्मेशन, स्पॉन्टेनियस इंट्राक्रेनियल हेमरेज, और बड़ी रक्त वाहिकाओं में रुकावट के कारण होने वाले इस्केमिक स्ट्रोक जैसी जटिल सेरेब्रोवैस्कुलर स्थितियों के इलाज में उच्च-स्तरीय तकनीकों का प्रदर्शन किया और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी। ये स्थितियाँ दुनिया भर में मृत्यु और लंबे समय तक रहने वाली विकलांगता के प्रमुख कारणों में से हैं, जो हृदय रोगों के बाद दूसरे स्थान पर आती हैं।

न्यूरोवैस्कुलर बीमारियों के बढ़ते बोझ पर बात करते हुए, विशेषज्ञों ने बताया कि बिहार के सामने एक बड़ी चुनौती है। अनुमान है कि हर साल लगभग एक लाख मरीज़ इलाज के लिए आते हैं जबकि जागरूकता की कमी और आधुनिक इलाज तक पहुँच न होने के कारण लगभग दस लाख मामले ऐसे हैं, जिनका पता ही नहीं चल पाता या जिनका इलाज नहीं हो पाता।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित