नयी दिल्ली , फरवरी 09 -- उच्चतम न्यायालय ने अदालत परिसर के भीतर हिंसा की घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'गुंडा राज' करार देते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से विधि के शासन की विफलता है।
न्यायालय दिल्ली के तीस हजारी अदालत परिसर के भीतर एक अधिवक्ता पर हुए कथित हमले के संबंध में एक 'उल्लेख' पर सुनवाई कर रहा था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ को एक ऐसी घटना से अवगत कराया गया जो कथित तौर पर सात फरवरी को तीस हजारी कोर्ट में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हरजीत सिंह पाल की अदालत के सामने हुई थी।
मामले का उल्लेख करने वाले अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि वह आरोपी की ओर से पेश हो रहे थे, तभी शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कई व्यक्तियों के साथ मिलकर कथित तौर पर अदालत कक्ष के भीतर उन पर हमला कर दिया और मारपीट की।
अधिवक्ता ने कहा कि घटना के समय पीठासीन न्यायाधीश और अदालत के कर्मचारी वहां मौजूद थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए टिप्पणी की, "इस तरह का गुंडा राज हमें स्वीकार्य नहीं है। इसका मतलब है कि यह कानून के शासन की विफलता है।"मुख्य न्यायाधीश ने यह भी पूछा कि क्या इस घटना को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लाया गया है। यह जानने पर कि अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं की गई है, मुख्य न्यायाधीश ने पीड़ित अधिवक्ता को तुरंत प्रशासनिक रूप से यह मामला उठाने का निर्देश दिया।
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