नयी दिल्ली , अप्रैल 12 -- नौसेना के शीर्ष कमांडर पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री जहाजों के आवागमन में बाधा सहित भविष्य की अनेक समुद्री चुनौतियों पर अगले तीन दिनों तक गहन विचार विमर्श करेंगे।

नौसेना के शीर्ष कमांडरों के तीन दिन के सम्मेलन का पहला संस्करण मंगलवार से गुरुवार तक यहां नौसेना भवन में होगा। यह सम्मेलन राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसेना की परिचालन स्थिति, क्षमता विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के साथ रणनीतिक समन्वय की व्यापक समीक्षा के लिए एक मंच प्रदान करता है।

रक्षा मंत्रालय ने रविवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि यह संस्करण विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच भारतीय तेल और गैस टैंकरों की सुरक्षा की रक्षा के लिए समुद्र में त्वरित नौसैनिक तैनाती की गई है, साथ ही हिन्द महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय बलों का समन्वय भी हुआ है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद नौसेना के परिचालन सिद्धांत, अंतर-सेवा समन्वय और प्रौद्योगिकी आधारित प्रतिक्रिया तंत्र को पुनः सुदृढ़ करने के संदर्भ में भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष और गृह सचिव के संबोधन शामिल होंगे, साथ ही वरिष्ठ नौसैनिक नेतृत्व के साथ विस्तृत चर्चाएँ भी होंगी। इन संवादों का उद्देश्य परस्पर संचालन क्षमता और संयुक्तता को बढ़ाना तथा राष्ट्रीय स्थिरता, सुरक्षा ढांचे और भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर व्यापक समझ विकसित करना है। यह मंच राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ निकट संवाद का अवसर प्रदान करता है, जिससे नौसैनिक योजनाओं के लिए रणनीतिक दिशा निर्धारित की जा सके।

नौसेना प्रमुख, परिचालन कमांडरों और वरिष्ठ नौसैनिक नेतृत्व के साथ मौजूदा भू-रणनीतिक माहौल में बहुआयामी चुनौतियों से निपटने की योजनाओं की समीक्षा और मूल्यांकन करेंगे। सुरक्षा आवश्यकताओं के साथ-साथ विचार-विमर्श में निर्णायक परिचालन सफलता प्राप्त करने, गहरे समुद्र में संचालन क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण, मानव संसाधन प्रबंधन, सतत रखरखाव प्रथाओं, मानव रहित प्रणालियों के प्रभावी उपयोग, परिचालन लॉजिस्टिक्स और युद्धक तत्परता के लिए अन्य प्रमुख कारकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संपूर्ण नौसेना के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोडमैप के कार्यान्वयन तथा डेटा-आधारित प्रौद्योगिकियों की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

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