बागपत , मार्च 28 -- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के लोकार्पण के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास की नई संभावनाएं खुल गई हैं। इसका सीधा लाभ अब बागपत जिले को भी मिलने जा रहा है, जो आने वाले समय में निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों का नया केंद्र बनकर उभर सकता है।
बागपत की भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। दिल्ली एयरपोर्ट और जेवर एयरपोर्ट के बीच स्थित होने के कारण यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण ग्रोथ जोन के रूप में विकसित होगा। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसी मजबूत कनेक्टिविटी पहले से ही उपलब्ध है, जिससे यहां लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से बागपत के किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा। गन्ना, सब्जियां और डेयरी उत्पाद अब एयर कार्गो के माध्यम से देश-विदेश तक भेजे जा सकेंगे। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और वे आधुनिक व निर्यात आधारित खेती की ओर बढ़ेंगे। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना को नई गति मिलेगी। इससे कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी बड़ा बाजार मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में जमीन महंगी होने के कारण उद्योग अब बागपत जैसे किफायती क्षेत्रों की ओर रुख करेंगे। यहां वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स हब और छोटे-मध्यम उद्योग स्थापित होने की संभावना है। इसके साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आएगी और नए टाउनशिप विकसित होंगे।
एयरपोर्ट और उससे जुड़े उद्योगों के कारण हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एविएशन, होटल, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में स्थानीय युवाओं को नौकरी के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन में कमी आएगी। जेवर एयरपोर्ट की शुरुआती क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी, जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाया जाएगा। कार्गो क्षमता 2.5 लाख टन से बढ़ाकर 15 लाख टन तक की जाएगी। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, डिजियात्रा जैसी डिजिटल सुविधाएं और ग्रीन एनर्जी आधारित निर्माण इसे आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाते हैं।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अनुमान है कि यह एयरपोर्ट 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक योगदान देगा। कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट बागपत के लिए विकास का नया अध्याय साबित होगा, जहां खेती से लेकर उद्योग और सेवा क्षेत्र तक हर स्तर पर तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा।
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