नैनीताल , दिसंबर 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में हुए बवाल और हिंसा मामले में कांग्रेसी नेताओं की परेशानी बढ़ सकती है। सरकार ने सभी की जांच कराने की मांग मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली अदालत से की है।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में बुधवार को इस मामले में सुनवाई हुई। विजिलेंस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अदालत में पेश हुए।

सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता जेएस विर्क ने कहा कि एक ही मामले में छह मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सभी की जांच अलग-अलग की जा रही है। इसलिए जांच में विलंब हो रहा है।

यह भी कहा गया कि अदालत ने पांच जिला पंचायत सदस्यों की भूमिका के जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही उन कांग्रेसी नेताओंकी भूमिका की जांच भी की जानी चाहिए जो जिला पंचायत चुनाव में हुए बवाल के दौरान मौजूद थे।

इसके बाद अदालत ने सरकार को उन कांग्रेसी नेताओं के संबंध में जानकारी देने को कहा है। इस मामले में कल भी सुनवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि इसी साल 14 अगस्त को प्रदेश में जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव हुए थे। नैनीताल में चुनाव के दौरान कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी समर्थकों में झड़प हो गयी थी। इसी दौरान पांच जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण का आरोप भाजपा समर्थकों पर है।

यह भी चर्चा रही है कि प्रतिपक्ष के नेता यशपाल आर्य, उनके सुपुत्र और पूर्व विधायक संजीव आर्य, खटीमा के विधायक भुवन कापड़ी, हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश और कांग्रेस के जिला पंचायत अध्यक्ष की उम्मीदवार पुष्पा नेगी के पति लाखन नेगी इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद थे।

यह भी आरोप है कि तब ये सभी कांग्रेसी नेता कुछ जिला पंचायत सदस्यों को मतदान में हिस्सा लेने के लिए मतदान स्थल की ओर ले जा रहे थे। इस घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर जारी हुए हैं।

घटना के बाद सभी कांग्रेसी नेता उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश की अदालत में पहुंच गए थे और न्यायालय ने इस मामले में एक जनहित याचिका दायर कर ली थी। इस मामले की जांच अपराध शाखा अपराध जांच विभाग (सीबीसीआईडी) को सौंपी है।

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