श्रीनगर , मार्च 12 -- जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा करते हुए घटना की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है।
पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन भी किया।
जम्मू में बुधवार रात एक विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे फारूक अब्दुल्ला पर एक व्यक्ति ने करीब से गोली चलाने की कोशिश की, हालांकि वह सुरक्षित बच गए।
पार्टी के एक बयान में कहा गया कि इस घटना के विरोध और निंदा के लिए एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर और चिंताजनक हमला बताया गया। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि देश के वरिष्ठ नेता को निशाना बनाना केवल किसी व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
इस अवसर पर पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष शौकत अहमद मीर ने हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में घटना की पारदर्शी और विस्तृत जांच कराने तथा संभावित सुरक्षा चूक और लापरवाही की भी जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की गई।
बैठक में नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला के लंबे राजनीतिक जीवन और लोकतांत्रिक संघर्ष की सराहना करते हुए उन्हें दूरदर्शी, धर्मनिरपेक्ष और जनोन्मुखी नेता बताया, जिन्होंने क्षेत्र में सद्भाव, भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी सेवा दे चुके हैं और चार बार लोकसभा के सदस्य चुने गए हैं। इसके अलावा वह राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
नेताओं ने कहा कि वर्ष 1996 में जब जम्मू-कश्मीर कठिन दौर से गुजर रहा था, तब फारूक अब्दुल्ला ने साहस और नेतृत्व का परिचय देते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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