नयी दिल्ली , फरवरी 11 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्य प्रवक्ता और सांसद अनिल बलूनी ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि श्री गांधी ने बजट दस्तावेज़ को गलत पढ़कर संसद और देश को गुमराह करने का काम किया है।
श्री बलूनी ने एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट जारी कर कहा कि संसद में बजट की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन दस्तावेज़ को गलत उद्धृत करना और उसी आधार पर तर्क खड़ा करना लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है तथा यह देश की जनता की बुद्धिमत्ता का अपमान है।
श्री बलूनी ने श्री गांधी के उस बयान को गलत बताया जिसमें कहा गया था कि भारत को अमेरिका से निर्यात को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं मिली। श्री बलूनी के अनुसार वर्ष 2015 से 2025 के बीच अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष 20 अरब डॉलर से बढ़कर 40.9 अरब डॉलर हो गया है। इसी अवधि में अमेरिका को निर्यात 42.4 अरब डॉलर से बढ़कर 86 अरब डॉलर पहुंच गया। 2022 के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग शून्य से बढ़कर 2025 में 20 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
श्री बलूनी ने श्री गांधी द्वारा भारतीय डेटा अमेरिका को बेचे जाने के आरोप को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि बजट में 2047 तक भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वाली कंपनियों को कर छूट का प्रस्ताव है, जिससे डेटा लोकलाइजेशन मजबूत होगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों को क्लाउड और एआई सेवाएं देने के अधिक अवसर मिलेंगे और 140 करोड़ भारतीयों का डेटा भारत में ही सुरक्षित रहेगा।
श्री बलूनी ने कहा कि श्री गांधी ने यह भी दावा किया कि बजट में वैश्विक अस्थिरता के बीच आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि बजट में दुर्लभ खनिज, नये सेमीकंडक्टर मिशन तथा ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर का प्रस्ताव शामिल है।
श्री बलूनी ने कहा कि श्री गांधी ने डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने की बात पुराने अमेरिकी तथ्यात्मक आंकड़ों के आधार पर कही, जबकि नए समझौते में डिजिटल नियमों पर आगे बातचीत का प्रावधान है। उन्होंने कृषि क्षेत्र खोलने के आरोप को भी भ्रामक बताते हुए कहा कि भारत हर साल 2 अरब डॉलर से अधिक की दालें आयात करता है, 2023 में यह 2.6 अरब डॉलर था, जबकि कपास का आयात भी भारत के कुल उत्पादन का लगभग दसवां हिस्सा ही है।
श्री बलूनी ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से कहा कि अमेरिका के लिए न तो कृषि और न ही डेयरी क्षेत्र खोला जा रहा है और किसानों को कोई खतरा नहीं है। भारत के अमेरिका से लगभग 1.7 अरब डॉलर के कृषि आयात में करीब एक अरब डॉलर केवल पेड़ों पर उगने वाले सूखे मेवों (ड्राई नट्स) का है।
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