नयी दिल्ली , अप्रैल 10 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि देश के प्रशासन और नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

श्रीमती गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में आयोजित हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रशासन और नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। जब महिलाएं निर्णय लेने वाले पदों पर पहुंचेंगी, तभी वे समाज, परिवार और अपनी जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी बदलाव ला सकेंगी। दिल्ली में चलने वाली 'लखपति बिटिया' और 'अनमोल' जैसी योजनाएं इसी संवेदनशील दृष्टिकोण का परिणाम हैं, जो महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करती हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह 'बेटी बचाओ' से 'बेटी बढ़ाओ' तक की यात्रा को साकार करेगा। महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग दशकों पुरानी है। वर्ष 1931 से शुरू हुई यह पहल कई चरणों से गुजरी और वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का कानून बनना इस लंबे संघर्ष का परिणाम है और अब इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें और महिला सशक्तीकरण के इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दें। जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में बराबरी से भाग लेंगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत बनेगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का नया अध्याय लिखेगा और भारत को एक अधिक सशक्त, संतुलित और प्रगतिशील लोकतंत्र के रूप में स्थापित करेगा।

हस्ताक्षर अभियान के बाद मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित चाय स्टॉल पर छात्राओं और महिला शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच संवाद जितना सरल और सहज होगा, नीतियां उतनी ही प्रभावी और जनोन्मुखी बनेंगी।

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