नयी दिल्ली , दिसंबर 30 -- भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 'निर्यात के उद्देश्य से बनाये गये एम2एम/आईओटी उपकरणों में उपयोग के लिए विदेशी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम/ई-सिम कार्डों की बिक्री के लिए नियामक संरचना' पर अपनी सिफारिशें मंगलवार को जारी कर दीं।

ट्राई ने इस साल 04 जुलाई को 'निर्यात के लिए बनाये गये एम2एम/आईओटी उपकरणों में उपयोग के लिए विदेशी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम/ई-सिम कार्डों की बिक्री के लिए नियामक संरचना' विषय पर एक परामर्श पत्र जारी किया था। इस पर हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों और ऑनलाइन माध्यम से खुली बैठक में प्राप्त सुझावों के बाद ट्राई ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप प्रदान किया है।

संचार मंत्रालय ने बताया कि एम2एम/आईओटी उपकरणों (जैसे स्मार्ट मीटर, कनेक्टेड कार, औद्योगिक सेंसर) के भारतीय निर्माताओं को प्रायः विदेशी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम/ई-सिम कार्ड को अंतःस्थापित करने की आवश्यकता होती है ताकि उपकरण गंतव्य देश में निर्बाध रूप से सेवा प्रदान कर सकें। वर्तमान में निर्यात के लिए बनाये गये एम2एम/आईओटी उपकरणों में विदेशी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम/ई-सिम कार्डों की बिक्री के लिए देश में कोई नियामक संरचना मौजूद नहीं है।ट्राई की सिफारिश में कहा गया है कि निर्यात के लिए बनाये गये एम2एम/आईओटी उपकरणों में उपयोग के लिए विदेशी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम/ई-सिम कार्डों की बिक्री को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत एक सरल सेवा प्राधिकरण द्वारा विनियमित किया जाना चाहिये। इस नये सेवा प्राधिकरण का नाम "अंतर्राष्ट्रीय एम2एम सिम सेवा प्राधिकरण" सुझाया गया है।

इसमें कहा गया है कि भारतीय कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत कोई भी कंपनी अंतर्राष्ट्रीय एम2एम सिम सेवा प्राधिकरण प्राप्त करने की पात्र है। प्राधिकरण के लिए प्रवेश शुल्क, न्यूनतम इक्विटी, न्यूनतम नेटवर्थ, बैंक गारंटी एवं प्राधिकरण शुल्क शून्य होना चाहिये। प्राधिकरण के लिए आवेदन प्रक्रिया शुल्क पांच हजार रुपये रखने और 10 साल की वैधता की सिफारिश की है।

परीक्षण उद्देश्यों के लिए, विदेश के टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के सिम/ई-सिम कार्डों को भारत में अधिकतम छह महीने के लिए सक्रिय करने की अनुमति देने की भी बात कही गयी है।

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