नई दिल्ली , जनवरी 14 -- नीति आयोग के मंगलवार को जारी निर्यात तैयारी सूचकांक - 2024 में महाराष्ट्र देश के बड़े राज्यों में निर्यात कारोबार के लिए सबसे अधिक तैयारियों वाला राज्य घोषित किया गया है। उसके बाद तमिलनाडु और गुजरात का स्थान है।
छोटे राज्यों, नॉर्थ-ईस्ट और केंद्र शासित प्रदेश की श्रेणी में, उत्तराखंड रैंकिंग में सबसे ऊपर है।
सूचकांक में बड़े राज्यों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और तेलंगाना को भी "लीडर्स" (तैयारी की दृष्टि से अग्रणी राज्य) के रूप में वर्गीकृत किया गया। यह वर्गीकरण निर्यात के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विकास, नीतिगत सहायता, औद्योगिक वातावरण और निर्यात कारोबार में प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए कहया गया है।
सूचकांक में मध्य प्रदेश, हरियाणा, केरल और पश्चिम बंगाल को "चैलेंजर" श्रेणी में रखा गया, जो इन राज्यों की निर्यात क्षमता में कुशलता में वृद्धि को का संकेत है, लेकिन इन राज्यों में लॉजिस्टिक्स, लागत और सूक्ष्म, लघु औ मझोली इकाइयों के बीच समन्वय की कमियां बनी हुई हैं।
आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने कहा कि वैश्विक माहौल बहुत ज़्यादा अस्थिर बना हुआ है, लेकिन यह उन देशों के लिए नए अवसर भी प्रदान करता है जो खुद को ढालने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, "दुनिया बहुत मुश्किल दौर से गुज़र रही है," और कहा कि इस उथल-पुथल ने "राष्ट्रों को आगे बढ़ने के अवसर दिए हैं।"श्री सुब्रमण्यम ने निर्यात को आर्थिक वृद्धि का एक मुख्य चालक बताते हुए कहा कि भारत की लंबी अवधि की महत्वाकांक्षाओं के लिए यह क्षेत्र केंद्रीय महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि निर्यात भारत के 30,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का एक प्रमुख स्तम्भ है, जिसमें विदेशी बाजार में माल और सेवाएं बेचने के कारोबार का योगदान 7500 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है। यह तब के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक चौथाई होगा।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा, "इस प्रयास में राज्यों की एक बड़ी भूमिका है," और कहा कि निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 इस बात पर स्पष्ट संकेत देता है कि राज्य अपने एक्सपोर्ट को कैसे बढ़ा सकते हैं, प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत कर सकते हैं और वैश्विक बाज़ारों के साथ ज़्यादा गहराई से जुड़ सकते हैं।
नीति आयोग द्वारा कंसल्टेंसी कंपनी डेलॉइट के सहयोग से तैयार किया गया, ईपीआई-2024 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2021-22 से 20-23-24 के दौरान निर्यात क्षेत्र की तैयारियों के आकलन पर आधारित है। जिसमें चार प्रमुख क्षेत्रों - नीति और शासन, निर्यात के लिए अवसंरचनात्मक सुविधाओं की स्थिति, औद्योगिक और नवाचार का वातावरण, और निर्यात प्रदर्शन - में 70 संकेतकों का संगत उपयोग किया गया है।
इसमें राज्यों को बड़े राज्यों और छोटे राज्यों, उत्तर-पूर्व और केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है। इसके बाद विभिन्न मापदंडों पर इन वर्गों में लीडर्स (अग्रणी), चैलेंजर्स (प्रतिस्पर्धी) या एस्पायरर्स (आकांक्षी) के रूप में क्रमिक स्थान दिया गया ।
बड़े राज्यों में, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार और झारखंड को "एस्पायरर्स" श्रेणी में रखा गया, जो सीमित निर्यात विविधीकरण, कमजोर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में कम भागीदारी का संकेत है।
छोटे राज्यों, नॉर्थ-ईस्ट और केंद्र शासित प्रदेश की श्रेणी में, उत्तराखंड रैंकिंग में सबसे ऊपर रहा, उसके बाद जम्मू और कश्मीर, नागालैंड, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, और गोवा का नंबर है। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्र एस्पायरर कैटेगरी में बने हुए हैं। उनकी यह स्थिति लगातार क्षेत्रीय समस्याओं को उजागर करती है।
ईपीआई 2024 में पांच नए आयाम शामिल किए गए हैं, जिनमें मानव पूंजी, वृहद आर्थिक स्थिरता, एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र, लागत प्रतिस्पर्धा और कर्ज की सुविधा शामिल हैं।
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