, Dec. 16 -- भाजपा के दामोदर अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने जीएसटी की दरों में कमी की और आयकर सीमा बढ़ायी गयी है। भारतीय दंड संहिता के नाम पर भारतीय न्याय संहिता लायी गयी है। मोदी सरकार विधायी ढांचे को आधुनिक बनाने का काम कर रही है। कानून में आवश्यक संशोधन एक नियमित और आवश्यक प्रक्रिया है।

राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि कौन सा कानून अप्रासंगिक है या नहीं है, इसे कौन तय करेगा। क्या यह विधेयक लाने से पहले न्यायपालिका, राज्य सरकार या सामाजिक-नागरिक संगठनों से विचार-विमर्श किया गया है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों के अधिकार कम न हों। उन्होंने कहा कि विधेयक को किसी समिति को भेजकर उसकी राय या सिफारिश लेकर इसे बाद में लाया जाये तो अच्छा होगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एस वेंकटेश ने कहा कि बिना व्यापक चर्चा के सरकार विधेयक प्रस्तावित करती है और अपनी सुविधा अनुसार कानून पारित करवाती है। सरकार अपनी तरह से देश के नागरिकों को चलाना चाहती है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के बाल्या मामा सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे ने कहा कि समय के अनुसार कानूनों को हटाया या उनमें संशोधन करने का वह समर्थन करते हैं लेकिन सभी कानून हटाया या संशोधित करना ठीक नहीं है। सरकार का इरादा निजीकरण का है, और यह विधेयक उसी तरफ इशारा करता है।

श्री म्हात्रे ने बच्चे लेकर भीख लेकर मांगने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और उस बच्चों के भविष्य पर ध्यान दिये जाने की मांग की।

माकपा के सुदामा प्रसाद ने कहा कि त्वरित न्याय के नाम पर संशोधन से लोगों के अधिकार कम किये जायेंगे। सरकार देश को पुलिस राज में तब्दील करना चाहती है। क्या सरकार ने इस विधेयक को लाने से तमाम दलों से राय ली, किसी संगठन से मशविरा किया? उन्होंने विधेयक को विभिन्न संगठनों की राय के बाद लाने की मांग की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेल्वाराज वी ने कहा कि श्रम संहिताओं का श्रमिक संगठनों ने विरोध किया है। इसी तरह इस विधेयक को लेकर भी विरोध होने की संभावना है अत: सभी पक्षों से सलाह-मशविरे के बाद इसे लाना चाहिए।

कांग्रेस के गोवाल कागदा पडवी ने कहा कि स्पीड पोस्ट यदि समय पर नहीं पहुंचेगी, तो उसकी जवाबदेही कौन लेगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त चर्चा के बाद विधेयक को लाना चाहिए। इसे सर्वदलीय संसदीय समिति को भेजा जाना चाहिए।

भाजपा के रमेश अवस्थी ने कहा कि स्वच्छ प्रशासन के लिए यह विधेयक जरूरी है। सरकार के प्रशासन को सुदृढ़ करने के प्रयास इस विधेयक से प्रतिबिंबित होते हैं। यह विधेयक लोगों का जीवन सुगम बनाने में सहायक होगा।

निर्दलीय पप्पू यादव ने चिकित्सा क्षेत्र के निजीकरण का विरोध किया और कहा कि चिकित्सकों की मनमानी रोकी जानी चाहिए। सरकारी स्कूलों को बंद किये जाने का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 60 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किये गये। उन्होंने नौकरशही पर लगाम लगाने की मांग की और कहा कि अधिकारी देश को गुलाम बना देंगे। उन्होंने कहा कि कौन तय करेगा कि कौन कानून ठीक है और कौन ठीक नहीं है। उन्होंने विधेयक का विरोध किया।

चर्चा में वाईएसआरसीपी के गुरुमूर्ति मड्डीला, निर्दलीय उमेश भाई और अब्दुल रशीद शेख ने भी भाग लिया।

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