सुकमा, दिसंबर 14 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों को उनके परंपरागत काबिज वन भूमि का कानूनी अधिकार प्रदान किया जा रहा है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में यह पहल जिले के वनवासी परिवारों के लिए ऐतिहासिक साबित हो रही है। इससे न केवल उनकी आजीविका को स्थायित्व मिल रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।
जिला पीआरओ ने रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कोंटा विकासखंड के ग्राम चिंतलनार में रविवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम में 7 गांवों के 197 हितग्राहियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में एसडीएम कोंटा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। वन अधिकार पत्र उन आदिवासी परिवारों को दिए गए हैं, जो पीढ़ियों से जंगलों में निवास करते आ रहे हैं और खेती-किसानी के माध्यम से जीवनयापन करते हैं।
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