नासिक , फरवरी 04 -- महाराष्ट्र के नासिक जिले में कुपोषण के खिलाफ शुरू की गयी 'पोषणदूत' (न्यूट्रिशन एम्बेसडर) योजना सकारात्मक परिणाम दे रही है और पिछले साल 15 अगस्त को जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 39 अति कुपोषित बच्चे सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं।
नासिक जिले के पेठ, सुरगाणा, त्र्यंबकेश्वर सहित आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से 'पोषणदूत' योजना लागू की गई है।
योजना के अंतर्गत जिला और तालुका स्तर के अधिकारियों ने कक्षा-एक और कक्षा-दो के अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया है और उनके पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की नियमित निगरानी की जा रही है। प्रत्येक अधिकारी द्वारा बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दिए जाने से उनके स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है। इस कार्य के समन्वय के लिए तालुका स्तर पर बाल विकास परियोजना अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
नवंबर के अंत तक जिले में कुल 208 अति कुपोषित बच्चों में से 39 बच्चे सामान्य श्रेणी में आए हैं, जबकि 45 बच्चे मध्यम कुपोषण की श्रेणी में पहुंचे हैं।
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