वाशिंगटन , अप्रैल 6 -- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि चांद की ओर गया उसका मिशन आर्टेमिस टू की मदद से सोमवार रात को इंसान अंतरिक्ष में इतनी दूर जाएगा, जितनी दूर मानव इतिहास में आज तक कोई नहीं पहुँच पाया है। मानवता के इतिहास में इसे बहुत बड़ी छलांग माना जा रहा है।

नासा के अनुसार, मानव इतिहास में यह पहली बार होगा जब इंसान पृथ्वी से इतनी अधिक दूरी तय करेगा, जितनी दूर आज तक कोई भी अंतरिक्ष यात्री नहीं पहुँच सका है। यह मिशन न केवल चंद्रमा के करीब जाने का एक प्रयास है, बल्कि गहरे अंतरिक्ष की उन सीमाओं को लांघने की तैयारी है जिन्हें अब तक केवल विज्ञान कथाओं और दूरबीनों के जरिए ही देखा गया था। नासा का कहना है कि यह यात्रा मानवता की 'सबसे लंबी छलांग' साबित होगी।

इस ऐतिहासिक सफर के दौरान ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के सुदूर हिस्से यानी 'फार साइड' के पीछे से गुजरेंगे। यह रास्ता उन्हें पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी पर ले जाएगा। ऐसा करके आर्टिमस अपोलो 13 मिशन के दशकों पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा।

यह दल चंद्रमा की सतह पर तो कदम नहीं रखेगा, लेकिन उनकी यह मौजूदगी मंगल ग्रह जैसे भविष्य के बड़े मिशनों के लिए एक मजबूत नींव तैयार करेगी। नासा ने स्पष्ट किया है कि इतनी दूरी तय करने का मुख्य उद्देश्य गहरे अंतरिक्ष में मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाली प्रणालियों का कड़ा परीक्षण करना है।

रोचक बात यह है कि जब ये अंतरिक्ष यात्री ब्रह्मांड की इस अथाह गहराई में होंगे, तब वहां से पृथ्वी एक छोटे नीले बिंदु की तरह दिखाई देगी। नासा के वैज्ञानिकों ने इस मिशन को 'न्यू एरा ऑफ एक्सप्लोरेशन' करार देते हुए कहा है कि हम अब केवल चंद्रमा पर वापस जाने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उससे भी कहीं आगे जाने की क्षमता विकसित कर रहे हैं। आर्टेमिस II का यह महासफर यह साबित करने के लिए तैयार है कि इंसान अब पृथ्वी की कक्षा की सीमाओं को स्थायी रूप से छोड़कर सितारों के बीच अपनी नई पहचान बनाने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

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