जयपुर , अप्रैल 18 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष के लिए 'महिला सशक्तिकरण' केवल भाषणों तक सीमित है।

डाॅ गुर्जर ने अपने बयान में कहा कि दशकों तक 'महिला आरक्षण बिल' की बात करने वाले दल, जब उसे वास्तविकता में बदलने का समय आया, तो सदन में हंगामा कर उसके पारित होने में बाधा बने। उन्होंने कहा कि देश में नारी शक्ति को सशक्त होते देख विपक्ष असहज हो गया और जिम्मेदारी से बचने के लिए सदन से बाहर चला गया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को महिलाओं के वोट तो चाहिए, लेकिन संसद में उनकी भागीदारी स्वीकार नहीं है। 'पहले परिवार, फिर अन्य' की सोच रखने वाले ये दल नहीं चाहते कि देश की बेटियां निर्णय लेने वाली मुख्यधारा तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि देश की मातृशक्ति सब देख रही है और विपक्ष का वास्तविक चेहरा पहचान चुकी है। आने वाले समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से इसका जवाब मिलेगा।

उन्होंने कहा कि 'महिला हितैषी' होने का दावा करने वाले दलों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 33 प्रतिशत आरक्षण से लोकतंत्र खतरे में नजर आता है, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्हें महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि इसका श्रेय वर्तमान सरकार को मिलने से आपत्ति है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित