तिरुवनंतपुरम , दिसंबर 31 -- केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने बुधवार को कहा कि मानवतावाद, तर्कवाद एवं सार्वभौमिक बंधुत्व पर आधारित समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक नेता श्री नारायण गुरु का संदेश ऐसे समय में और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, जब इतिहास, संस्कृति एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को विकृत करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने 93वीं शिवगिरि तीर्थयात्रा का उद्घाटन करते हुए कहा कि गुरु द्वारा परिकल्पित यह तीर्थयात्रा एक औपचारिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के लिए ज्ञान आधारित आंदोलन है। उन्होंने याद दिलाया कि 1928 में सूत्रबद्ध शिवगिरि तीर्थयात्रा संदेश में शिक्षा, स्वच्छता, संगठन, वैज्ञानिक सोच, कृषि, व्यापार, उद्योग एवं प्रौद्योगिकी पर विशेष बल दिया गया था, जिसमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी थी।
केरल के सामाजिक इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री विजयन ने कहा कि अरुविप्पुरम का राज्याभिषेक जातिगत पदानुक्रम, ब्राह्मणवाद एवं सामंती उत्पीड़न को चुनौती देकर केरल पुनर्जागरण की शुरुआत का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि गुरु ने किसी जाति व्यवस्था को दूसरी जाति व्यवस्था से बदलने के लिए नहीं बल्कि एक ऐसी समाज का निर्माण करने के लिए काम किया जो जाति एवं धर्म के भेदभाव से मुक्त हो और भाईचारे के सिद्धांत से प्रेरित हो।
मुख्यमंत्री ने भारत की बहुल परंपराओं को नष्ट करने और संस्कृति के नाम पर अवैज्ञानिक विचारों को बढ़ावा देकर देश पर एक ही तरह की सांस्कृतिक विचारधारा थोपने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ऐसे कदम लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता एवं तर्कसंगत सोच के लिए खतरा हैं।
गुरु की शिक्षाओं के चिरस्थायी प्रभाव को रेखांकित करते हुए, श्री विजयन ने कहा कि केरल के प्रगतिशील आंदोलन एवं कल्याणकारी नीतियां, जिनमें भूमि सुधार, शिक्षा सुधार और सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की पहल शामिल हैं, गुरु के मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से प्रेरित हैं।
श्री नारायण गुरु को एक सच्चा सार्वभौमिक शिक्षक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका दर्शन जाति, धर्म एवं राष्ट्रीयता से परे है, जिसने केरल को सामाजिक अंधकार से ज्ञानोदय की ओर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभायी। उन्होंने समाज से संकीर्ण जाति या धार्मिक सीमाओं में सीमित करने के प्रयासों का विरोध करने तथा एकता, मानवीय गरिमा एवं सामाजिक न्याय के गुरु के आदर्शों को निरंतर रखने का आह्वान किया।
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