नारायणपुर , दिसंबर 30 -- छत्तीसगढ में जिला नारायणपुर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में वर्ष 2025 पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों वाला वर्ष रहा है। जिले में नक्सल प्रभाव को कमजोर करने और आमजन को सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कुल 27 नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किए गए हैं। इनमें थाना ओरछा क्षेत्र में 12, थाना सोनपुर में 7 तथा थाना कोहकामेटा क्षेत्र में 8 कैंप शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2025 में नक्सलियों की तथाकथित अघोषित राजधानी कुतुल सहित कोडलियार, बेड़माकोटी, पदमकोट, कंडुलपार, नेलांगुर, पांगूड़, रायनार, एडजूम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, आदींगपार और मंदोड़ा जैसे दुर्गम इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सका है।
वर्ष 2025 में जिले में कुल 4.96 करोड़ रुपये के इनामी 43 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। इनमें 3 केंद्रीय समिति सदस्य, 1 विशेष जोनल समिति सदस्य, 3 मिलिट्री कंपनी कमांडर, 1 डिप्टी कमांडर सहित अन्य कैडर के नक्सली शामिल हैं। मारे गए नक्सलियों में 21 मई 2025 को सीसीएम केशव राव उर्फ बसवराज सहित 27 नक्सली तथा 22 सितंबर 2025 को सीसीएम कादरी नारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा और रामचंद्र रेड्डी उर्फ राजू दादा शामिल हैं।
इसी अवधि में 78 माओवादी नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 6.095 करोड़ रुपये के इनामी 298 प्रतिबंधित नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है। पुलिस का कहना है कि नक्सल उन्मूलन अभियान आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
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