नारायणपुर, फरवरी 21 -- छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिले के करंगाल परगना स्थित मरकाबेड़ा गाँव में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस दिवस धूमधाम से मनाया गया।

इस विशेष दिवस पर शनिवार को आसपास के 65 गाँवों के आदिवासी समुदाय के लोग एकत्रित हुए और अपनी मातृभाषा गोण्डी के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया। यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि आदिवासी पहचान, संस्कृति और विरासत को बचाने की एक सामूहिक मुहिम का स्वरूप लिए हुए था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग, बुद्धिजीवी, युवा और महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने मातृभाषा गोण्डी के वर्तमान हालात और उसके भविष्य पर गंभीर चिंतन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थानीय बुद्धिजीवियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का उद्देश्य विश्व की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देना है। इस दिवस की शुरुआत यूनेस्को द्वारा 1999 में की गई थी और वर्ष 2000 से इसे पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। 21 फरवरी की तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि 1952 में इसी दिन तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में विद्यार्थियों ने अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए आंदोलन किया था, जिसमें कई छात्र शहीद हो गए थे।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और लुप्तप्राय भाषाओं का संरक्षण करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को के अनुसार विश्व में लगभग 7000 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं, लेकिन वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के कारण कई छोटी भाषाएँ लुप्त होने के कगार पर हैं। अगर इन्हें संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में अनेक भाषाएँ समाप्त हो सकती हैं।

भारत के संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमारा देश बहुभाषी है और संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ शामिल हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में बोली जाने वाली गोंडी, हल्बी, भतरी जैसी जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।" मरकाबेड़ा में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय विशेषकर युवा पीढ़ी को उनकी मातृभाषा गोण्डी के प्रति जागरूक करना और उन्हें इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित करना था।

वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के लिए बेहतर सीखने का माध्यम बनती है। यह सांस्कृतिक पहचान की वाहक है और इससे भावनात्मक जुड़ाव एवं आत्मविश्वास बढ़ता है। इस दौरान उपस्थित समाजजनों ने संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन और आने वाली पीढ़ियों के बीच गोण्डी भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान देंगे।

इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें कलाकारों ने गोण्डी भाषा में गीत और नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भाषाई सम्मान, सांस्कृतिक विविधता और मानव अधिकारों का प्रतीक है, जिसकी रक्षा करना हर व्यक्ति का दायित्व है।

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