दीमापुर , दिसंबर 06 -- नागालैंड जैव-संसाधन मिशन ने शनिवार को कोहिमा में ग्रामीण विकास राज्य संस्थान (एसआईआरडी) से डाबर इंडिया लिमिटेड की असम के तेजपुर स्थित पूर्वोत्तर इकाई को ज़ैंथोक्सिलम (मिचिंगा) के बीजों की पहली खेप रवाना की। इसे नागालैंड के जैव-संसाधन के वाणिज्यीकरण में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

मुख्य सचिव सेंटियांगर इम्चेन ने डाबर इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, उद्यमियों और किसानों की मौजूदगी में खेप को हरी झंडी दिखाई।

श्री इम्चेन ने इस मौके पर कहा कि नागालैंड के पास औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में बहुत ज़्यादा क्षमता है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक मूल्य को बेहतर बनाने और हासिल करने के लिये नागालैंड जैव-संसाधन मिशन बनाया गया था। मिशन ने पिछले एक दशक में पूरे राज्य में औषधीय और सुगंधित पौधों की सूची बनायी, जो इनके वाणिज्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने डाबर इंडिया के साथ समझौते के ज़रिये इस पहल को आगे ले जाने के लिये अपनी टीम की सराहना करते हुए कहा कि मिचिंगा पूरे नागालैंड में बड़े पैमाने पर उगाया और इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पत्तियों और बीजों दोनों का ही स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा कि चूंकि पहले से ही राज्य के अंदर इस फसल की खरीद-फरोख्त होती है इसलिए इसमें बड़े पैमाने पर व्यापार की बहुत ज़्यादा क्षमता है।

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