फगवाड़ा , अप्रैल 27 -- पंजाब में कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव तोरा ने सोमवार को 'युद्ध नशीयां दे विरुद्ध' नामक नशा-विरोधी अभियान के सुचारु संचालन के लिए जिला पुलिस के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया और कहा कि अभियान के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं, लेकिन सार्थक सफलता सक्रिय जनभागीदारी पर निर्भर करती है।
श्री तोरा ने बताया कि गाजीपुर गांव के बलजीत सिंह की उनके पैतृक गांव में मृत्यु हो गयी, जिसका संभावित कारण मादक द्रव्यों का सेवन है। उन्होंने बताया कि मृतक पिछले लगभग पांच वर्षों से नशे की लत से जूझ रहे थे, और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी पीड़ित थे, जो उनकी मृत्यु का कारण बन सकती हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को केवल आपराधिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें समय पर चिकित्सा उपचार, परामर्श और पुनर्वास सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
श्री तोरा ने बताया कि कपूरथला पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत लगभग 1,600 मामले दर्ज किये हैं और लगभग 1,750 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, 'सुरक्षित पंजाब' पहल के तहत 663 एफआईआर दर्ज की गयी हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हमारी प्राथमिकता बनी हुई है, लेकिनइसे रोकथाम और वसूली के प्रयासों के साथ-साथ जारी रखना होगा।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विभिन्न नशामुक्ति केंद्रों में लगभग 3,500 व्यक्तियों का नामांकन हो चुकाहै, जो प्रभावित व्यक्तियों में मदद लेने की बढ़ती इच्छा को दर्शाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 638 युवाओं ने स्वेच्छा से पुलिस से संपर्क कर नशे की लत से छुटकारा पाने और मुख्यधारा में पुनः शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है, जिसे उन्होंने उत्साहजनक और बढ़ती जागरूकता का सूचक बताया।
उन्होंने कहा कि अभियान को प्रभावशाली बताते हुए श्री तोरा ने चेतावनी दी कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के दम पर नहीं जीती जा सकती। उन्होंने परिवारों, सामुदायिक नेताओं और नागरिक समाज से पुनर्वास प्रयासों में सहयोग देने, अवैध गतिविधियों की रिपोर्ट करने और कमजोर व्यक्तियों को उपचार सुविधाओं तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने मादक पदार्थों के संकट के वैश्विक आयाम की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि कनाडा जैसे देशों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिले हैं, जहां पिछले एक दशक में मादक पदार्थों के ओवरडोज से लगभग 18,000 मौतें दर्ज की गयी हैं। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक और निरंतर कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता की एक स्पष्ट चेतावनी है।
श्री तोरा ने अपनी अपील को दोहराते हुए नागरिकों से बिना किसी झिझक के आगे आने, पुलिस के साथ सहयोग करने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया, और इस बात पर जोर दिया कि चल रहे अभियान में दीर्घकालिक सफलता के लिए सामुदायिक भागीदारी ही आधारशिला है।
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