नयी दिल्ली , दिसंबर 15 -- उद्योग एवं वाणिज्य जगत ने देश के निर्यात में नवंबर में जोरदार तेजी और व्यापार घाटे में तेज गिरावट पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच यह प्रदर्शन भारत के निर्यात क्षेत्र की क्षमता और गतिशीलता दर्शाता है।

उद्योग जगत ने निर्यात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सरकार की आरे से सहायक नीतियों ओर प्रोत्साहनों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी के निर्यात-आयात के आंकड़ों पर टिपण्णी करते हुए कहा नवंबर में निर्यात में जोरदार बढ़ोतरी पर संतोष जताया जो देश के निर्यात सेक्टर की गतिशीलता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रदर्शित करता है।

नवंबर में भारत का वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात 38.13 अरब डालर तक पहुंच गया जो सालाना आधार पर 19.37 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। महीने के दौरान वस्तुओं का आयात 62.66 अरब डॉलर का रहा। इस दौरान सेवा क्षेत्र का अनुमानित निर्यात उल्लेखनीय बढोतरी के साथ 35.86 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सेवा आयात में पिछले वर्ष के 17.25 अरब डॉलर की तुलना में थोड़ा बढ़ कर 17.96 अरब डॉलर रहा।

श्री रल्हन ने कहा, ' सेवा निर्यात में मजबूत गति के साथ-साथ वस्तु निर्यात में लगभग 19.4 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि भारत के निर्यात सेक्टर के लिए बहुत आशाजनक संकेत है। व्यापार में तेज गिरावट लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी वैश्विक मांग को दक्षतापूर्वक पूरा करने में भारतीय निर्यातकों की क्षमता को रेखांकित करती है।'फियो अध्यक्ष ने कहा कि एक मुख्य सकारात्मक विशेषता वस्तु व्यापार घाटे में आई कमी रही जो अक्तूबर के 41.68 अरब डॉलर से कम होकर 24.53 अरब डॉलर पर आ गयी। यह मजबूत निर्यात गति और बेहतर व्यापार प्रबंधन को प्रदर्शित करता है।

श्री रल्हन ने इस बात पर भी बल दिया कि कई प्रमुख सेक्टरों में निरंतर गतिशीलता के साथ साथ निर्यात बाजारों के विविधीकरण ने निर्यात वृद्धि को सहायता देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि निरंतर नीतिगत सहायता, बेहतर लाॅजिस्टिक्स दक्षता और प्रतिस्पर्धी निर्यात वित्तपोषण के साथ, भारत का निर्यात आगे आने वाले महीनों में इस सकारात्मक मार्ग को बनाये रखने की अच्छी स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारत के माल पर अगस्त में 50 प्रतिशत का उच्च शुल्क थोपे जाने के बावजूद अप्रैल-नवंबर के बीच अमेरिका निर्यात के लिए भारत का शीर्ष निर्यात गंतव्य बना रहा। यह स्पष्ट रूप से भारत के निर्यातक समुदाय की गतिशीलता और परिस्थिति का सामना करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है।

श्री रल्हन ने दुहराया कि लागत प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने, अनुपालन तथा प्रक्रियागत चुनौतियों को सरल बनाने और निर्यात वृद्धि को बनाये रखने तथा व्यापार घाटे में और कमी लाने के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से निरंतर नीतिगत उपायों की आवश्यकता है।

पीएचडी उद्योग मंडल के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, 20 प्रमुख प्रमुख देशों में से 14 के साथ भारत का निर्यात नवंबर में बढ़ा है जो बाहरी व्यापार में बढ़ते विविधीकरण और क्षेत्र के लचीलेपन को दिखाता है।

इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद ( ईईपीसी इंडिया) के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि अक्टूबर में भारी गिरावट के बाद, इस साल नवंबर में इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में उछाल आया। नवंबर 2025 में इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात 11.01 अरब डालर होने का अनुमान है, जो पिछले साल इसी महीने के 8.9 अरब डालर की तुलना में 23.7 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है।

ईईपीसी के अनुचार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर महीने में इंजीनियरिंग सामानों का कुल निर्यात पिछले साल के मुकाबले 4.25 प्रतिशत बढ़ कर 79.74 अरब डॉलर रहा।

उन्होंने कहा , 'ये ताज़ा आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं, खासकर ऐसे परिस्थिति में जबकि भारत के निर्यात माल की सूची की ज़्यादातर चीज़ों को ट्रंप सरकार के 50 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित