चेन्नई , फरवरी 25 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के दिग्गज नेता आर नल्लाकन्नू के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घोषणा की कि उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ 'लाल सलाम' के तौर पर विदाई दी जायेगी।

भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के संस्थापक और शताब्दी पुरुष आर नल्लाकन्नू के निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है।

देश और राज्य के नेताओं की ओर से संवेदनाओं का तांता लगने के बीच भाकपा ने दिवंगत कॉमरेड के सम्मान में एक सप्ताह के शोक की घोषणा की है। उन्होंने अपना जीवन श्रमिक वर्ग, दलितों, गरीबों और किसानों के कल्याण और अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया था और वे भाकपा की राज्य इकाई के सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। दिवंगत आत्मा के सम्मान और शोक के प्रतीक के रूप में पार्टी का झंडा आधा झुका दिया गया।

तमाम राजनीतिक नेताओं ने राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल (आरजीजीजीएच) का दौरा किया, जहां श्री नल्लाकन्नू ने 101 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।

वे उम्र संबंधी बीमारियों के कारण एक फरवरी से अस्पताल में उपचाराधीन थे। पिछले कुछ दिनों से उनके महत्वपूर्ण अंगों के काम करना बंद कर देने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ने लगी थी, हालांकि आईसीयू में विशेषज्ञों की कई टीम उनकी निरंतर निगरानी कर रही थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। बेहतरीन इलाज के बावजूद, उपचार का कोई असर नहीं हुआ और बुधवार दोपहर 1:55 बजे उनका निधन हो गया।

श्री नल्लाकन्नू के पार्थिव शरीर को लेपन के बाद भाकपा कार्यालय ले जाया जायेगा, जहां उसे राजनीतिक नेताओं और जनता के अंतिम दर्शनों के लिए रखा जायेगा। विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी से भी नेताओं के चेन्नई पहुंचने की उम्मीद है, ताकि वे भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के इस वयोवृद्ध और अंतिम नेताओं में से एक को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

नेताओं ने पोइटा, एस्मा और टेस्मा जैसे दमनकारी कानूनों के दौरान उनके झेले संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि जब स्वतंत्र भारत में सशस्त्र संघर्ष में शामिल होने के कारण कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, तब तिरुनेलवेली जिले के नांगुनेरी के पुलियूरकुरीची गांव में 23 वर्षीय आर. नल्लाकन्नू को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें हिरासत में प्रताड़ित किया गया, जिस दौरान एक पुलिस अधिकारी ने उनकी मूंछें जला दी थीं। यह एक ऐसी घटना थी जिसने उनके जीवन पर अमिट छाप छोड़ी। हालांकि उन्होंने शायद ही कभी अपने दुखों के बारे में बात की, इसके बजाय उन्होंने हमेशा अपने साथियों की पीड़ा को ही प्राथमिकता दी।

एक स्वतंत्रता सेनानी और तमिलनाडु में कम्युनिस्ट आंदोलन व भाकपा के सबसे कद्दावर जननेताओं में से एक ने आज अंतिम विदा ली और अपने पीछे एक ऐसी विरासत और छाप छोड़ गये, जो सभी राजनीतिक नेताओं की यादों में हमेशा अंकित रहेगी। कल दोपहर पार्टी कार्यालय से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जायेगी। भाकपा के राज्य सचिव वीरपांडियन ने अस्पताल में पत्रकारों को बताया कि पूरे राजकीय सम्मान के बाद श्री नल्लाकन्नू की अंतिम इच्छा के अनुसार उनके पार्थिव शरीर को शोध के लिए मद्रास मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया जायेगा।

इस बीच टीएनसीसी अध्यक्ष के सेल्वपेरुन्थगई ने दिवंगत नेता और ट्रेड यूनियनवादी को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जनता और समाज के प्रति उनकी सेवा के सम्मान में श्री नल्लाकन्नू को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा जाए।

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