भोपाल , दिसंबर 17 -- मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने एनएसयूआई के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए हजारों छात्रों को बड़ी राहत दी है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की न्यायमूर्ति विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि नर्सिंग पाठ्यक्रमों की रिक्त सीटों पर तत्काल प्रवेश प्रक्रिया के लिए औपचारिक आदेश जारी किए जाएं।

यह याचिका एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रवि परमार की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाए जाने के बावजूद पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग एवं एमएससी नर्सिंग को काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जो स्पष्ट रूप से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।

अदालत को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिए थे कि राज्य में नर्सिंग पाठ्यक्रमों की रिक्त सीटें केवल उन्हीं योग्य अभ्यर्थियों से भरी जाएं, जिन्होंने राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा में भाग लिया हो और भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा निर्धारित पात्रता को पूरा करते हों। इसके बावजूद राज्य नर्सिंग परिषद की लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह गईं।

हाईकोर्ट ने प्रस्तुत आंकड़ों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। विवरण के अनुसार पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग में शासकीय कॉलेजों में 66 तथा निजी कॉलेजों में 3018 सीटें रिक्त हैं, वहीं एमएससी नर्सिंग में शासकीय कॉलेजों में 70 और निजी कॉलेजों में 1120 सीटें खाली हैं। न्यायालय ने इसे प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम बताते हुए छात्रों के भविष्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को गंभीर माना।

सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने भारतीय नर्सिंग परिषद को निर्देश दिए कि वह तत्काल औपचारिक आदेश जारी करे, ताकि पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग एवं एमएससी नर्सिंग की रिक्त सीटों पर नियमों के अनुसार अलग-अलग काउंसलिंग प्रक्रिया प्रारंभ की जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पूरी प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूर्ण की जाए।

फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि यह निर्णय केवल एनएसयूआई की जीत नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के हजारों नर्सिंग छात्रों के भविष्य की जीत है। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण छात्र लंबे समय से परेशान थे, लेकिन न्यायालय के समय पर हस्तक्षेप से उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एनएसयूआई आगे भी छात्रों के अधिकारों और पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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