अलवर , दिसम्बर 20 -- नये श्रम कानून भविष्य की कार्य पद्धति, कार्यस्थल और कर्मचारियों के कार्य करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
प्रबंध एवं श्रम कानून विशेषज्ञ अनिल कौशिक ने राजस्थान में भिवाडी में शनिवार को आयोजित स्कूल ऑफ मैनजमेंट स्किल्स द्वारा आयोजित उद्योगों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में स्थायी प्रकृति की नौकरियां करीब समाप्त हो जाने की संभावनाहैं और अधिकतर कर्मचारी नियत अवधि के लिए ही नियोजित किये जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वेतन की परिभाषा को अनावश्यक रूप से संशलिष्ठ बनाया गया है। कर्मचारी वर्ग को नयी वेतन परिभाषा से ग्रेच्युटी, प्रॉवीडेंट फंड और ईएसआई में लाभ होगा और साथ ही निर्धारित अवधि के लिए नियोजित कर्मचारियों को एक वर्ष की अवधि पर भी ग्रेच्युटी दिये जाने का प्रावधान किया गयाहैं, जो पहले नहीं था।
श्री कौशिक ने बताया कि पत्रकारों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान के लिए सेवा अवधि पांच वर्ष के स्थान पर तीन वर्ष कर दी गयी है। संस्थान में होने वाली उत्पादन की मुख्य गतिविधियों में ठेका श्रमिक के नियोजन को प्रतिबंधित कर दिया गया हैं। चालीस वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मचारियों की वर्ष में एक बार नियोजक द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच करानी होगी। उद्योगों में श्रमिकों से उनकी इच्छा के विपरीत ओवरटाइम नहीं कराया जा सकेगा। नौकरी छोड़ने के दो दिन के भीतर ही कर्मचारियों का पूरा भुगतान नियोजक को करना होगा। रात्रि पाली में भी महिला कर्मचारी काम कर सकेंगी और नियोजक को उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करना होगा।
उन्होंने कहा कि जिस संस्थान में श्रमिकों की एक ही यूनियन है, वहां उसे स्वतः ही मान्यता प्राप्त होगी और नियोजक को उनसे समस्याओं के समाधान के लिए विमर्श करना होगा। साथ ही अब ऐसे प्रावधान भी जोड़े गये हैं, जिससे कि श्रमिक यूनियनों के लिए हड़ताल करना मुश्किल हो जायेगा। चारों श्रम संहिताओं को इस तरह से बनाया गया है कि उद्योगों और श्रमिकों के अधिकारों और कर्तव्यों में संतुलन बना रहे।
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