नयी दिल्ली , दिसंबर 27 -- केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि ग्रामीण रोजगार गारंटी का कानून पहले से बेहतर तथा पिछड़ी ग्राम पंचायतों के लिए अधिक फायदेमंद है और इसके विरुद्ध ' कांग्रेस का शोर सिर्फ राजनीतिक है।'श्री चौहान ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हर पंचायत एक जैसी नहीं है। जो पंचायतें सबसे अधिक पिछड़ी हैं, जहाँ आज भी रोज़गार की सख्त आवश्यकता है और बुनियादी ढाँचे की कमी है, वहाँ अधिक निधि, अधिक सहायता और अधिक अवसर पहुँचें, इसकी भी व्यवस्था की गई है।'उन्होंने कहा कि , ' कांग्रेस के पास न नीयत थी, न नीति। यह वही कांग्रेस है जिसने चुनावी फ़ायदे के लिए इस योजना के साथ महात्मा गांधी जी का नाम जोड़ा। यह वही कांग्रेस है, जिसने समय-समय पर मनरेगा का बजट कम किया। यह वही कांग्रेस है, जिसने मजदूरी फ्रीज की। आज कांग्रेसी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।"उल्लेखनीय है कि कांग्रेस कार्यसमिति की नयी दिल्ली में हुई बैठक में 'मनरेगा' की जगह बनाये गये 'विकसित भारत जी राम जी' कानून को गरीब विरोधी तथा राज्यों के विरुद्ध बताते हुए इस के लिए आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संवाददाताओं से कहा है कि मोदी सरकार ने गरीबों को दबाने और कुचलने के लिए मनरेगा को खत्म कर नया कानून बनाया है और इसके खिलाफ कांग्रेस 5 जनवरी से पूरे देश में बड़े स्तर पर व्यापक आंदोलन शुरू करेगी।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा , " आज जब तकनीक, पारदर्शिता और समय पर भुगतान के ज़रिये यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पैसा सीधे मेहनतकश के खाते में पहुँचे, तो कांग्रेस को इसमें हमला नज़र आता है। इस योजना में तय किया गया है कि फैसले अब दिल्ली से नहीं, बल्कि गाँव से निकलेंगे। ग्राम पंचायतें बैठ कर अपने प्लान स्वयं बनायेंगी।'उन्होंने कहा कि इस योजना में रोजगार गारंटी बढ़ायी गयी है और एक ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन के काम की गरंटी दी गयी जो अब तक 100 दिन की थी। तय समय में काम न मिलने पर बेरोज़गारी भत्ता देने और मज़दूरी भुगतान में देरी पर मुआवज़े का प्रावधान है। इस तरह नये कानून में , "साफ है रोजगार सुरक्षा घट नहीं रही, बल्कि बढ़ रही है।"केंद्रीय मंत्री ने कहा , ' ग्राम सभा और पंचायत के अधिकार कमजोर नहीं, बल्कि और सशक्त हो रहे हैं। कार्यों की पहचान और उनकी प्राथमिकता ग्राम सभा तय करेगी। क्रियान्वयन, निगरानी और गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की गई है। साथ ही सोशल ऑडिट को अनिवार्य बनाकर खर्च और भुगतान की सार्वजनिक समीक्षा का प्रावधान किया गया है। महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल दिया गया है।" उन्होंने कहा कि जो पंचायतें सबसे अधिक पिछड़ी हैं, जहाँ रोजगार की ज्यादा जरूरत है वहां के लिए अधिक निधि, अधिक सहायता और अधिक अवसर सुलभ कराने की व्यवस्था की गई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित