नयी दिल्ली , फरवरी 27 -- नयी श्रृंखला के आधार पर वित्त वर्ष 2023-24 के स्थिर मूल्य पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) यानी वास्तविक जीडीपी में दो प्रतिशत की कमी आयी है।
पुरानी श्रृंखला में तुलना का आधार वर्ष 2011 -12 था जबकि नयी श्रृंखला के लिए वित्त वर्ष 2022-23 को आधार बनाया गया है। इसके तहत वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान और 2023-24 और उसके बाद के संशोधित अनुमान शुक्रवार को पहली बार जारी किये गये।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जीडीपी की ताज रिपोर्ट जारी किये जाने के बाद विभाग के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नयी श्रृंखला में 2023-24 के वास्तविक जीडीपी में कुल मिलाकर 2.0 प्रतिशत की गिरावट दिखती है जबकि वित्त वर्ष 2022-23 के जीडीपी में नयी सीरीज के अनुसार गणना करने पर 2.9 प्रतिशत की कमी आयी है।
उन्होंने बताया कि नयी श्रृंखला में वर्ष 2023-24 प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं खनन क्षेत्र) में 0.1 प्रतिशत की मामूली कमी और द्वितीयक क्षेत्र (विनिर्माण, बिजली आदि) क्षेत्र के जीडीपी में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उन्होंने बताया कि यह बदलाव बिजली और विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़ों में सुधार और 'दोहरे डिफ्लेटर' (मांग और आपूर्ति पक्ष दोनों तरफ से मूल्य सूचकांक के समायोजन) के इस्तेमाल की वजह से हुआ है।
उन्होंने कहा कि नयी श्रृंखला में 600 से अधिक डिफ्लेटरों का प्रयोग किया जा रहा है जबकि पिछली श्रृंखला में इनकी संख्या 180 के आसपास थी।
उन्होंने कहा कि तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) के वास्तविक जीडीपी में 2.0 प्रतिशत की सबसे ज्यादा गिरावट देखी गयी, जिसका मुख्य कारण संकेतकों पर आधारित अनुमान के तरीकों की जगह सालाना सर्वे की रिपोर्टों को आधार बनना और मात्रा के आधार पर अग्रिम अनुमान लगाने के तरीके अपनाना है।
उन्होंने बताया कि पुरानी सीरीज के आधार पर 2022-23 का जीडीपी 268.8 लाख करोड़ रुपये था जो नयी सीरीज अपनाने पर 261.2 लाख करोड़ रुपये रहा गया।
उन्होंने कहा कि आधार वर्ष बदलने का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था में आधारभूत बदलावों को ध्यान में रखते हुए आंकड़ों को वास्तविकता के करीब लाना है ताकि आंकड़े सही स्थिति प्रस्तुत करें।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2011-12 की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था में बड़े बुनियादी बदलाव आये हैं। उस समय माल एवं सेवा कर प्रणाली नहीं थी, डिजिटलीकरण नहीं हुआ था, इलेक्ट्रिक वाहन नहीं आये थे। अब पहले की तुलना में ज्यादा सूक्ष्म आंकड़े जुटाना संभव हुआ है।
उन्होंने कहा कि सांख्यिकी विभाग का प्रयास है कि अब राज्य जीडीपी के आंकड़ों को भी सुधारा जाये। विचार यह भी है कि आगे चलकर जिला जीडीपी के आंकड़े तैयार किये जाएं।
उन्होंने कहा कि कुल जीडीपी में दो प्रतिशत का बदलाव पद्धति में सुधार को दिखाता है। घरेलू क्षेत्र अनुमानों के लिए सालाना सर्वे का इस्तेमाल और डिफ्लेशन (मूल्य सूचकांक समायोजन) के तरीकों में बदलाव शामिल हैं।
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