नयी दिल्ली , जनवरी 08 -- शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से परंपरा, नवाचार और संवाद को बढ़ावा देने के लिए 13 जनवरी से 'कला यात्रा 2026' का शुभारंभ नयी दिल्ली में होने जा रहा है।
पद्म विभूषण सोनल मानसिंह द्वारा निर्देशित यह सांस्कृतिक उत्सव कमानी ऑडिटोरियम में 13 से 15 जनवरी और 28 तथा 29 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। इसकी थीम 'नयी नृत्य रचनाओं का यह उत्सव' है।
दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग और 'सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांसेज' के सहयोग से इस महोत्सव को प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस उत्सव में देशभर के प्रतिष्ठित गुरुओं और संस्थानों द्वारा तैयार की गई 10 नई नृत्य रचनाएँ पेश की जाएंगी। इनमें सनातन इतिहास और पौराणिक कथाओं से लेकर पर्यावरण, लिंग और वर्तमान सामाजिक सरोकारों जैसे विषयों को दिखाया जाएगा। ये प्रस्तुतियाँ भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, यक्षगान, सत्रिया और ओडिसी जैसे शास्त्रीय रूपों से जुड़ी रहेंगी।
कार्यक्रम के आयोजन से पहले आयोजित चर्चा में सुश्री मानसिंह ने इस महोत्सव को 'केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत संवाद' बताया।
सुश्री मानसिंह ने परंपरा के भीतर नवीनीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "हमारी शास्त्रीय परंपराओं को जीवित, संवेदनशील और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नई नृत्य रचनाएँ आवश्यक हैं। जब नवाचार हमारी जमीनी हकीकत से जुड़ा होता है, तो वह परंपरा का विस्तार बनता है, उसे तोड़ता नहीं है।"चर्चा के अवसर पर गुरुओं, कोरियोग्राफर और सांस्कृतिक दिग्गजों का एक प्रतिष्ठित पैनल शामिल हुआ, जिसमें श्री बाबू पणिक्कर, श्रीमती वनश्री राव, श्रीमती भास्वती मिश्रा, श्रीमती सिंधु मिश्रा, श्री भवानंद बोरबयान, श्रीमती दीप्ति ओमचेरी भल्ला और श्रीमती मीनाक्षी दास मौजूद थे।
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