नयी दिल्ली , जनवरी 02 -- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया 2026 (आईपी 2026) का शुक्रवार को विमोचन किया। यह भारत की औषधि मानकों की आधिकारिक पुस्तक का 10वां संस्करण है।

श्री नड्डा ने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया देश में दवाओं के लिए आधिकारिक मानक पुस्तक के रूप में कार्य करती है और भारत के फार्मास्यूटिकल्स नियामक ढांचे का आधार है। उन्होंने कहा कि 10वां संस्करण वैज्ञानिक प्रगति, वैश्विक सर्वोत्तम विधियों और फार्मास्युटिकल विनिर्माण और विनियमन में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिससे मोनोग्राफ की कुल संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है। उन्होंने कहा कि तपेदिक रोधी, मधुमेह रोधी और कैंसर रोधी दवाओं के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट सहित प्रमुख चिकित्सीय श्रेणियों में कवरेज को काफी मजबूत किया गया है, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपयोग की जाने वाली दवाओं का व्यापक मानकीकरण सुनिश्चित हुआ है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय फार्माकोपिया के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति मिली है क्योंकि यह भारत सरकार की स्वास्थ्य कूटनीति के अंतर्गत एक प्रमुख एजेंडा बन गया है। उन्होंने बताया कि भारतीय फार्माकोपिया को अब वैश्विक दक्षिण के 19 देशों में मान्यता प्राप्त है।

श्री नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) के अंतर्गत भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) की उल्लेखनीय प्रगति का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि 2009-2014 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में योगदान के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर 123वें स्थान पर था लेकिन 2025 में यह आठवें स्थान पर पहुंच गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) और फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) टीम की सराहना करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि मजबूत फार्माकोविजिलेंस प्रणाली रोगी सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और सुदृढ़ नियामक निगरानी के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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