जगदलपुर , दिसंबर 13 -- छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से लंबे समय तक प्रभावित रहे बस्तर अंचल के आदिवासी बच्चों के सपनों ने अब नई उड़ान भरी है, जिन बच्चों ने कभी अपने जीवन में घोड़ा तक नहीं देखा था, वे घुडसवारी में दक्ष हो गये हैं।
राज्य में शनिवार को बस्तर ओलंपिक के दौरान ये बच्चे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष घुड़सवारी का भव्य और ऐतिहासिक प्रदर्शन करेंगे।
यह पहल न केवल खेल प्रतिभा को मंच दे रही है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की मजबूत मिसाल भी बन रही है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा और कांकेर जिले प्रदेश के पहले ऐसे जिले बन गए हैं, जहां आदिवासी बच्चों को व्यवस्थित और पेशेवर ढंग से घुडसवार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गीदम स्थित जावंगा एजुकेशन सिटी में इन बच्चों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां 10 से 12 विदेशी नस्ल के घोड़ों के माध्यम से बच्चों को सुबह और शाम निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
थोरब्रेड और हेनोवेरियन जैसी विदेशी नस्ल के घुड़दौड़, स्टंट और पोलो खेल के लिए जाने जाते हैं। इन घोड़ों के साथ प्रशिक्षण लेकर बच्चे आत्मविश्वास के साथ टर्निंग, जंपिंग और स्टंट का अभ्यास कर रहे हैं। इन आदिवासी बच्चों ने बेंगलुरु और दिल्ली में आयोजित पोलो प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है और कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार अपने नाम किए हैं।
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