कबीरधाम/बस्तर , मार्च 24 -- छत्तीसगढ़ में मंगलवार को दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे का दावा किया गया है।

उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पापाराव ने अपने साथियों के साथ बस्तर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है। आत्मसमर्पण से पहले गृहमंत्री और पापाराव के बीच मोबाइल पर बातचीत भी हुई।

पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर एक के कमांडर माड़वी हिड़मा के बाद कमांडर पापाराव अंतिम बड़ा लड़ाका था। पापाराव पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। बस्तर रेंज में हुई कई मुठभेड़ों के दौरान यह कई बार बच निकलने में कामयाब हुआ था। उसके आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद का समूल नाश कर देने का संकल्प व्यक्त किया था। इसी संदर्भ में अपने गृह जिले कबीरधाम में एक साक्षात्कार के दौरान गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि राज्य में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में अब कोई सक्रिय सदस्य नहीं बचा है। एरिया कमेटी और पार्टी के सदस्यों ने वर्दी और हथियार त्याग दिए हैं। इस तरह से राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी सात दिन का समय शेष है, इस बीच बचे-खुचे छोटे-बड़े कैडरों का आत्मसमर्पण करवा लिया जाएगा।

गृहमंत्री ने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री शाह का संकल्प छत्तीसगढ़ में पूरा हो गया है और अब ऐसी स्थिति बन गई है कि राज्य में नक्सलवाद की सशस्त्र गतिविधियां पूर्ण रूप से समाप्त हो चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के समन्वित अभियान और विकास कार्यों के चलते बस्तर क्षेत्र में नक्सली संगठन की सक्रियता लगातार घटी है। पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ ही अब इस क्षेत्र में शांति स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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