श्रीगंगानगर , मार्च 31 -- राजस्थान बोर्ड के 12वीं कला वर्ग का परीक्षा परिणाम मंगलवार को आया तो कई घरों में खुशियों की लहर दौड़ गयीं, लेकिन श्रीगंगानगर जिले के रावला इलाके के चक 7 केएनडी गांव में 93.80 प्रतिशत अंक लाने के बावजूद नकिता के घर सन्नाटा पसरा हुआ है।

गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की इस होनहार छात्रा ने 93.80 प्रतिशत अंक हासिल किये, लेकिन इसकी खुशियां मनाने के लिये वह दुनिया में नहीं हैं। परिणाम आने से पहले 20 मार्च को उसकी मौत हो गयी थी।

नकिता को बचपन से ही डायबिटीज थी। वह मात्र चार वर्ष की उम्र से इंसुलिन के इंजेक्शन ले रही थी। आठवीं कक्षा में बीमारी की चपेट में आने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। फिर 10वीं में टॉप किया और 90.50 प्रतिशत अंक लाये। 12वीं के बाद उसका सपना और बड़ा था-कलेक्टर बनकर देश सेवा करना। मां-बाप दोनों मजदूर और अनपढ़ हैं, लेकिन बेटी की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।

पिछले दिनों परीक्षा के समय नकिता को तेज बुखार आ गया। चिकित्सकों ने पीलिया बताया। फिर भी वह रुकी नहीं। इंसुलिन का इंजेक्शन लगाकर, बुखार की हालत में भी परीक्षा देने स्कूल पहुंची। घर वालों को कहती-12वीं में टॉप करना है, कलेक्टर बनना है। फिर 10 मार्च को हालत बिगड़ी तो नाना केसरसिंह, मां चरणजीतकौर और पिता मंगलसिंह उसे पीलीबंगा से हनुमानगढ़ के सरकारी अस्पताल ले गये। वहां से बीकानेर के पीबीएम अस्पताल भेज गया। दो दिन वेंटिलेटर पर लड़ाई लड़ी, लेकिन 20 मार्च को उसकी सांसें थम गयीं।

आज परिणाम आया तो मां चरणजीतकौर बेटी की तस्वीर को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने बताया-बेटी तेज बुखार में भी पढ़ना नहीं छोड़ती थी। कहती थी मां-"मुझे पढ़ना है, कलेक्टर बनना है।"पिता मंगलसिंह भी आंसू रोक नहीं पाये। परिवार के सबसे होशियार बच्ची का सपना अधूरा रह गया।

नकिता की बड़ी बहन पिंद्रकौर बीएसटीसी की तैयारी कर रही है, छोटी बहन निशु ने 10वीं में 68 प्रतिशत हासिल किये और छोटा भाई अरमान आठवीं में पढ़ता है।

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