बीजापुर , फरवरी 10 -- छत्तीसगढ में नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के दुर्गम ग्राम पल्सेगुण्डी में सुरक्षा बलों ने एक साथ दो महत्वपूर्ण कार्रवाइयां पूरी की हैं। सोमवार को न केवल यहां एक नवीन सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैंप स्थापित किया गया, बल्कि गांव के समीप के जंगल में माओवादियों द्वारा निर्मित एक अवैध स्मारक को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। इन कार्रवाइयों को क्षेत्र में राज्य की उपस्थिति मजबूत करने और माओवादी प्रतीकों को मिटाने की एक स्पष्ट रणनीति के तहत अंजाम दिया गया।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह नया कैंप फरसेगढ़ थाना क्षेत्र में स्थापित किया गया है और इसके साथ ही वर्ष 2024 के बाद से जिले में बनाए गए ऐसे कैंपों की संख्या 35 हो गई है। डीआरजी, जिला बल और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की संयुक्त टीमों ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और कड़ाके की ठंड के बावजूद इस कैंप की स्थापना सफलतापूर्वक की। अधिकारियों का कहना है कि कैंप स्थापना के साथ ही सुरक्षा बलों ने जंगल में मौजूद उस अवैध संरचना को नष्ट कर दिया, जिसे माओवादी अपने विचारधारात्मक प्रभाव और डर के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।
इस संयुक्त अभियान को सुरक्षा के साथ-साथ विकास की कुंजी माना जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि पल्सेगुण्डी कैंप भोपालपटनम को फरसेगढ़, सेण्ड्रा और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से जोड़ने वाली कड़ी का काम करेगा। इंद्रावती नदी पर पुल निर्माण के कार्य को भी गति मिलने की उम्मीद है। इसके फलस्वरूप सुदूर वनांचल के गांवों तक बेहतर सड़क संपर्क और आधारभूत सुविधाएं पहुंच सकेंगी।
इस कैंप के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि न केवल स्मारक का विध्वंस बल्कि कैंप की स्थापना से भी माओवादियों की अंतर-राज्यीय गतिविधियों पर रोक लगेगी और क्षेत्र में आम नागरिकों के मन से भय कम होगा।
बीजापुर पुलिस के आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 2024 से अब तक नक्सल उन्मूलन अभियान में गति आई है। इस अवधि में 918 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 232 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं और 1163 को गिरफ्तार किया गया है। नए कैंपों की स्थापना और स्मारकों के विध्वंस जैसे कदमों को इन सफलताओं को और बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।
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