हैदराबाद , दिसंबर 21 -- तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने भारत की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत पर जोर देते हुए कहा है कि ध्यान स्थायी शांति, सद्भाव और नैतिक जीवन का मूलभूत मार्ग है।
श्री वर्मा शहर के बाहरी इलाके में कान्हा शांति वनम के पास रविवार को आयोजित दूसरे विश्व ध्यान दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थेराज्यपाल ने कहा कि वैश्विक ध्यान समारोह में उपराष्ट्रपति के साथ शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है, जो आंतरिक कल्याण में भारत के योगदान का सम्मान है।
उन्होंने वेदों, उपनिषदों, योग सूत्रों और भगवदगीता का हवाला देते हुए कहा कि ध्यान बदलते समय में मानवता की स्थायी प्रतिक्रिया रहा है, जो स्पष्टता, आत्म-नियंत्रण और सद्भाव को बढ़ावा देता है। उन्होंने समझाया कि प्राचीन आह्वान आंतरिक यात्रा को असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और नश्वरता से अमरता की ओर ले जाते हैं, जिससे ध्यान स्थायी शांति के मूल में आ जाता है।
उन्होंने चित्त वृत्ति निरोध के योग सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक आसनों का नाम नहीं, बल्कि मानसिक वृतियों को शांत करने का नाम है और विश्व ध्यान दिवस आंतरिक मौन और विवेक पर ध्यान केंद्रित कर इस मूल सार को बहाल करता है।
उप राष्ट्रपति ने वसुधैव कुटुंबकम- 'संसार एक परिवार है' का उल्लेख करते हुए कहा कि ध्यान अहंकार की सीमाओं को भंग करता है और एकता को जीने के अनुभव के रूप में संभव बनाता है। उन्होंने कहा कि आंतरिक पूर्णता लालच और संघर्ष को कम कर सामाजिक सद्भाव की नींव बनती है।
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