मुंबई , मार्च 05 -- बजट पेश होने की पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की ओर से एक बैठक में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों की संख्या पर सीमा तय किये जाने के बाद गुरुवार को सदन में विवाद खड़ा हो गया।
इस फैसले का सभी दलों के विधायकों ने कड़ा विरोध किया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लगभग 150 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित विरोध पत्र सौंपा है। उन्होंने प्रतिदिन इन प्रस्तावों को केवल पांच तक सीमित करने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कदम सार्वजनिक महत्व के जरूरी मुद्दों को उठाने की उनकी क्षमता कम करता है।
पारंपरिक रूप से विधानसभा में एक सत्र के दौरान प्रतिदिन 10 से 25 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा की जाती रही है। विधायकों का तर्क है कि इस नये प्रतिबंध से कई सदस्य पूरे सत्र के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित चिंताओं को उठाने से वंचित रह जायेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने हालांकि निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सदन की कार्यवाही में अनुशासन लाना, सदन के कामकाज को सुचारू बनाना और प्रचार या राजनीतिक हमलों के लिए इस प्रावधान का दुरुपयोग रोकना है।
सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों को भी कम समय में पेश किये गये प्रस्तावों का जवाब देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि गलत जवाब देने से मंत्रियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के नोटिस जारी हो सकते हैं।
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