नैनीताल , मार्च 07 -- उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश सरकार से गंभीर सवाल किये हैं। उन्होंने पलायन, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार, अनियोजितट पर्यटन, कानून व्यवस्था तथा आपदा के साथ दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

श्री आर्य कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्तराखंड आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारों द्वारा अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के सामने रखना और उनका उत्सव मनाना स्वाभाविक है लेकिन जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड इस समय कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहा पलायन गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। गांव खाली होते जा रहे हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति भी समय-समय पर सवालों के घेरे में रही है। खासकर महिला सुरक्षा बड़ी चुनौती रही है।

पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में संसाधनों का अभाव और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता आज भी बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और घटती छात्र संख्या शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है। प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी भी एक बड़ा सवाल है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तराखंड आपदा के लिहाज से संवेदनशील राज्य है और हर वर्ष प्राकृतिक आपदाएं बड़ी चुनौती बनकर सामने आती हैं। किसानों की आर्थिक स्थिति भी चिंता का विषय है। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई गांव आज भी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है लेकिन कई पर्यटन स्थलों पर अव्यवस्थित विकास, बढ़ता पर्यावरणीय दबाव और स्थानीय लोगों को अपेक्षित आर्थिक लाभ न मिल पाना भी चिंता का विषय है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौती भी सवालों में रही है।

श्री आर्य ने अंत में कहा कि जब राज्य सरकार अपने चार वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है, तो यह अवसर केवल उत्सव का नहीं बल्कि आत्ममंथन और जवाबदेही का भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को उम्मीद है कि इस अवसर पर सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री उत्तराखंड से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा प्रस्तुत करेंगे।

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