मुंबई , मार्च 14 -- महाराष्ट्र में भिवंडी पूर्व से समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने शनिवार को मांग की कि 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' को समीक्षा के लिए राज्य विधानमंडल की संयुक्त प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार ने 13 मार्च को विधानसभा में 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' पेश किया था, जिसका उद्देश्य जबरन या धोखे से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना बताया गया। इसके एक दिन बाद श्री शेख ने मांग की है कि इस विधेयक को समीक्षा के लिए राज्य विधानमंडल की एक संयुक्त प्रवर समिति के पास भेजा जाए और इस पर जनसुनवाई भी आयोजित की जानी चाहिए, ताकि इस विधेयक के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई जा सकें, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
इस मुद्दे पर बोलते हुए विधायक ने कहा कि आम लोगों को वर्तमान में गैस नहीं मिल रही है, होटल बंद हो रहे हैं और कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं। इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय, विधानमंडल धर्म स्वतंत्रता विधेयक जैसे बिल पर बहस कर रहा है, जो समाज में विभाजन पैदा करेगा।
विधायक रईस शेख ने आगे कहा कि इस विधेयक को बिना चर्चा के पारित नहीं किया जाना चाहिए और इस पर विस्तृत बहस की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "इसलिए, इस विधेयक को राज्य विधानमंडल की एक संयुक्त प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए जिसमें दोनों सदनों के सदस्य शामिल हों। समिति में अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि विधेयक पारित करने से पहले गहन चर्चा आवश्यक है।"विधानमंडल में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को अपर्याप्त बताते हुए विधायक रईस शेख ने कहा कि नागरिक समाज समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों को इस विधेयक पर अपने विचार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "सरकार को आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने के लिए एक सार्वजनिक सूचना जारी करनी चाहिए और उन पर सुनवाई करनी चाहिए।" विधायक रईस शेख ने यह भी जोड़ा कि वे सोमवार को इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखेंगे।
राज्य के कुल 35 नागरिक और अल्पसंख्यक संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने इस विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि यह निजता, धर्म की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को कमजोर करता है। 'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज' ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में धर्म परिवर्तन का अधिकार भी शामिल है।
पिछले साल, पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला की अध्यक्षता में इस विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति बनाई गई थी। प्रस्तावित कानून के अनुसार, धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन का नोटिस देना अनिवार्य होगा, जिस दौरान आपत्तियां उठाई जा सकती हैं और पुलिस जांच की जा सकती है। धर्म परिवर्तन के लिए किये गये विवाहों को अवैध माना जाएगा। यह विधेयक अवैध धर्म परिवर्तन में शामिल संस्थानों या व्यक्तियों के लिए सात साल तक के कारावास और 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव करता है।
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