नयी दिल्ली , जनवरी 26 -- हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता धर्मेन्द्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। धर्मेन्द्र का 24 नवंबर 2025 को निधन होने के बाद हिंदी फिल्म जगत में अपूरणीय क्षति हुई थी। यह सम्मान गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल है, जिसे गृह मंत्रालय ने जारी किया।
पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में आठ दिसंबर 1935 को जन्मे धर्मेंद्र का पूरा नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल था। उनके पिता केवल किशन सिंह देओल एक विद्यालय के प्रधानाचार्य थे। सिनेमा के प्रति गहरे लगाव के चलते धर्मेंद्र ने रमेश सैगल की शोला और शबनम (1961) से पहली व्यावसायिक सफलता हासिल की। इसके बाद अनपढ़ (1962) और बिमल रॉय की बंदिनी (1963) जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली। बंदिनी को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। वर्ष 1965 में राम महेश्वरी की काजल ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया।
धर्मेंद्र के साथ-साथ वरिष्ठ मलयालम अभिनेता ममूटी और प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अल्का याज्ञनिक को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा ये पुरस्कार वर्ष के दौरान राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में प्रदान किये जायेंगे। ममूटी, जिन्हें भारत के श्रेष्ठ अभिनेताओं में गिना जाता है और जिनकी वैश्विक स्तर पर बड़ी प्रशंसक संख्या है, ने अनुभवंगल पालिचकल (1971) से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने विभिन्न भाषाओं और विधाओं में सशक्त भूमिकाएं निभाईं और पिछले वर्ष केरल राज्य फिल्म पुरस्कारों में सातवीं बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता।
अलका याग्निक पिछले चार दशकों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करती आ रही हैं। उन्होंने अगर तुम साथ हो, चांद छुपा बादल में, टिप-टिप बरसा पानी, चुरा के दिल मेरा और तेरे नाम जैसे गानों को अपनी आवाज़ दी है। अभिनेता आर माधवन को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिये पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। हिंदी, तमिल और तेलुगु सिनेमा में समान रूप से सक्रिय माधवन ने बॉलीवुड में रहना है तेरे दिल में (2001) से शुरुआत की और मणि रत्नम की अलाई पायुत्ते से विशेष पहचान बनाई। उन्होंने रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट से निर्देशन में पदार्पण किया, जिसे सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। हाल ही में वह आदित्य धर की धुरंधर में नजर आए।
वरिष्ठ अभिनेता सतीश शाह को भी मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। एफटीआईआई से प्रशिक्षित सतीश शाह ने जाने भी दो यारो से विशेष पहचान बनायी और टेलीविजन पर ये जो है जिंदगी तथा साराभाई वर्सेस साराभाई से घर-घर लोकप्रिय हुए। विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडेय को भारतीय विज्ञापन उद्योग में दशकों के योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। उनका निधन 24 अक्टूबर 2025 को 70 वर्ष की आयु में हुआ था।
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