...पंकज शर्मा से...रायपुर , मार्च 21 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 ने प्रदेश में बड़ा सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है और जहां एक ओर सरकार इसे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने वाला सख्त और जरूरी कानून बता रही है, वहीं विपक्ष एवं ईसाई समाज इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधान के खिलाफ करार दे रहे हैं।
इस नये कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जहां सामान्य मामलों में सात से 10 साल की जेल और कम से कम पांच लाख रुपये का जुर्माना होगा, वहीं संवेदनशील वर्गों (महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति/ जनजाति और पिछड़ा वर्ग) के मामलों में सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल और 10 लाख रुपये जुर्माना तय किया गया है।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान इस कानून को देश के सबसे सख्त कानूनों में शामिल करता है।
नये कानून के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह नियमन में लाया गया है। धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य किया गया है। अनुष्ठान कराने वाले धर्मगुरु को भी पूर्व सूचना देना जरूरी है। बिना अनुमति के धर्मांतरण को सीधे अवैध माना जाएगा, दोबारा इस तरह का अपराध करने पर उम्रकैद की सजा होगी। सहयोग करने वालों को भी छह से तीन वर्ष की सजा मिलेगी।
इसके तहत हर जिले में विशेष अदालत और छह महीने में सुनवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा विवाह के उद्देश्य से किये गये धर्म परिवर्तन को अदालत 'शून्य' घोषित कर सकती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा है," यह कानून आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए एक निर्णायक कदम है। लंबे समय से अशिक्षा, गरीबी और अज्ञानता का लाभ उठाकर प्रलोभन, दबाव और भय के माध्यम से धर्मांतरण की घटनायें सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक संतुलन और समरसता प्रभावित होती है। इस विधेयक के माध्यम से ऐसी अवैध और अनैतिक गतिविधियों पर अब प्रभावी रोक लगेगी। "उन्होंने कहा, " नये कानून के तहत धर्मांतरण कराने वाले और धर्मांतरण करने वाले दोनों को निर्धारित प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। आवेदन की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका परीक्षण किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी प्रकार का प्रलोभन, दबाव या छल इसमें शामिल न हो। प्राधिकृत अधिकारी द्वारा एक माह के भीतर जांच कर अनुमति दी जाएगी, तभी धर्मांतरण वैध माना जाएगा।"श्री साय ने कहा, " पूर्व में वर्ष 1968 का कानून अपेक्षाकृत कमजोर था, अब यह नया कानून अधिक सख्त और प्रभावी है। इससे इस प्रकार की गतिविधियों पर निश्चित रूप से अंकुश लगेगा। जहां-जहां अवैध धर्मांतरण होता है, वहां सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है। "उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा, "संविधान में धर्म की स्वतंत्रता तो है, परंतु पब्लिक ऑर्डर उससे ऊपर है और पब्लिक ऑर्डर संभालने के लिए कोई भी राज्य कानून बना सकता है। कांग्रेस वोट बैंक राजनीति ही करती रही है. उन्हें फर्क नहीं पड़ता देश टूट जाये. भारतीय संस्कृति-परंपरा के मुद्दों पर चर्चा करने से भाग जाती है। आज इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बिल पर कांग्रेस सदन से पलायन कर गयी। "उन्होंने बस्तर की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, " आज बस्तर में धर्मांतरण करने वालों ने वर्ग संघर्ष उत्पन्नकर दिया है। यह नक्सलवाद से भी बड़ी समस्या है. अगर हम कड़ा कानून नहीं लेंगे तो समाज को क्या जवाब देंगे? माओवाद भी जो वर्ग संघर्ष खड़ा नहीं कर सका, धर्मांतरण ने सामाजिक संघर्ष को बढ़ा दिया है. यह एक नयी बड़ी समस्या है, जिसका समाधान जरूरी है। यह कानून किसी भी धर्म में परिवर्तन रोकने के लिए नहीं, बल्कि अवैध तरीके से हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए है। "कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, " 2006 में बीजेपी की सरकार यह बिल ला थी. 20 साल तक इसे पेंडिंग क्यों रखा गया? इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।"पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा, " विधेयक का अर्थ समझ नहीं आया। कोई धर्म खतरे में नहीं है. यह केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास है, इसके अलावा कुछ नहीं।"नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा, "मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसे प्रवर समिति को सौंप देना चाहिए।"सदन में विपक्ष ने इन मुद्दों पर चर्चा से पहले ही बहिर्गमन कर दिया था।
धर्मांतरण के विरोध में 'घर वापसी' अभियान भी लंबे समय से सक्रिय है। दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव द्वारा शुरू इस अभियान को अब उनके पुत्र प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढ़ा रहे हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित