रांची , जनवरी 26 -- झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने 77 वें गणतंत्र गणतंत्र दिवस के मौके पर लोहरदगा बी एस कॉलेज स्टेडियम में झंडा फहराया।
परेड का निरीक्षण और सलामी लेने के साथ मंत्री के हाथों झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान , चौकीदारी और अनुकम्पा पर बहाल लोगों के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया गया। इस मौके पर मंत्री श्रीमती तिर्की ने कहा कि ये क्षण देश की आजादी और अपने संविधान पर गर्व करने का होता है। स्वतंत्रता सेनानियों, वीर सपूतों, महापुरुषों के योगदान और बलिदान को नमन करते हुए इतिहास के पन्नों को पलटना भी जरूरी है।
श्रीमती तिर्की ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी और राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के द्वारा तिरंगे का ध्वजारोहण के साथ भारत का संविधान देश को समर्पित हुआ। संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तिथि का निर्धारण क्यों किया गया इसे भी जानना चाहिए। दरअसल 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया था। जिसे भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस के रूप मनाया गया।
मंत्री श्रीमती तिर्की ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को दिल्ली की ठंडी सुबह में देशभक्ति की गर्माहट के बीच सी राजगोपालाचारी ने भारत को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। आज के दौर में देशभक्ति के बजाय कुछ लोग धर्मभक्ति को बढ़ावा देने में लगे है। युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम के महत्व के साथ इसके इतिहास को पढ़ने की जरूरत है। देश की आजादी में वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को अनुभव कर युवा समाज में एक गहरी लकीर खींच सकते है ।
संविधान में समानता का अधिकार दिया गया है। संविधान से हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने की राजनीतिक साजिश करने वालों से सचेत रहने की जरूरत है . लोहरदगा के कुड़ू की घटना निंदनीय है। सरकार अलगाववादी सोच को खारिज करती है और इसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समाज में लोगों को अपनी एकता और एकजुटता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाना होगा।
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