चेन्नई , मार्च 15 -- तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाले 'धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन' (एसपीए) ने रविवार को पूरे राज्य में विशाल विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा क्षेत्र की 'समग्र शिक्षा अभियान' (एसएसए) जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य के हिस्से का फंड रोकने और पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते रसोई गैस (एलपीजी) की कमी को रोकने में विफल रहने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।
राज्य के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के 31 मंत्रियों ने अपने-अपने जिलों में इस आंदोलन की अगुवाई की। इसमें द्रविड़ कषगम अध्यक्ष के वीरमणि, कांग्रेस (टीएनसीसी) अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई, एमडीएमके संस्थापक वाइको और वीसीके नेता थोल थिरुमावलवन सहित वामपंथी दलों माकपा और भाकपा तथा कमल हासन की पार्टी एमएनएम के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया।
हाथों में खाली गैस सिलेंडर, अपनी पार्टी के झंडे और तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट में तमिलनाडु के लिए किसी नयी परियोजना की घोषणा नहीं की गयी और राज्य के हिस्से का जायज फंड रोक दिया गया है, जिससे विकास कार्यों में बाधा आ रही है।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि केंद्र की 'दोषपूर्ण' विदेश नीति और एहतियाती कदमों की कमी के कारण देश भर में रसोई गैस की भारी किल्लत हो गयी है। इसका सबसे बुरा असर होटलों, रेस्तरां और एमएसएमई क्षेत्रों पर पड़ रहा है, जिससे कई प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र तुरंत कदम उठाकर एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।
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